दिल्ली-ऋषिकेश ‘नमो भारत’ पर आया बड़ा अपडेट, अब 3 घंटे में पूरा होगा सफर

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दिल्ली। देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से देव भूमि यानी उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों की यात्रा अब और सुगम और तेज हो सकती है। जी हां… दिल्ली-ऋषिकेश ‘नमो भारत’ पर बड़ा अपडेट सामने आया है। नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) को हरिद्वार और ऋषिकेश तक बढ़ाने की योजनाओं पर चर्चा चल रही है। नमो भारत (RRTS) नेटवर्क के विस्तार के बाद दिल्ली से ऋषिकेश पहुंचने में लगने वाला समय घटकर लगभग 3 घंटे रह जाएगा। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दिल्ली और पश्चिमी यूपी के लोगों के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार की यात्रा बेहद आरामदायक हो जाएगी।

इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर को उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों से तेज़ गति से जोड़ना है। साथ ही मौजूदा दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर को और उत्तर की ओर बढ़ाना है, जिससे एनसीआर और प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आ सकता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह योजना लागू होती है, तो दिल्ली-NCR और गाजियाबाद से ऋषिकेश तक का यात्रा समय घटकर सिर्फ 2.25 से 3 घंटे रह जाएगा। अभी, चालू नमो भारत कॉरिडोर दिल्ली को मेरठ से जोड़ता है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो गया है। प्रस्तावित विस्तार मेरठ के मोदीपुरम से शुरू होगा और नेशनल हाईवे 58 के साथ-साथ चलेगा, जो हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचने से पहले कई प्रमुख कस्बों से होकर गुजरेगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री के बीच हुई हाई लेवल बैठक

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच हुई हाई लेवल चर्चाओं के बाद इस प्रस्ताव को गति मिली है। जिसमें रैपिड रेल नेटवर्क का विस्तार एक प्रमुख एजेंडा था। यह परियोजना यात्रा के तरीकों को फिर से परिभाषित कर सकती है, जिससे NCR के निवासियों के लिए वीकेंड ट्रिप और तीर्थयात्राएं अधिक सुविधाजनक हो जाएंगी। इससे हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे शहरों में हॉस्पिटैलिटी और आवास की मांग भी बढ़ सकती है।

इन इलाकों को जोड़ेगा नमो भारत
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार इस कदम पर विचार कर रही है और यह क्षेत्रीय परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ी छलांग साबित हो सकता है। इस विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पर्यटन, रियल एस्टेट और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जिन मुख्य स्टेशनों का मूल्यांकन किया जा रहा है, वे हैं दौराला, सकौती, खतौली और पुरकाजी, जो उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा के करीब हैं। यह मार्ग रुड़की होते हुए अंत में हरिद्वार के ज्वालापुर और ऋषिकेश पर समाप्त होगा।