कवर्धा। कबीरधाम जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में अदालत ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश गितेश कुमार कौशिक की अदालत ने आरोपी अश्वनी पांडेय को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही धारा 201 के तहत सात वर्ष के कठोर कारावास और कुल 21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह अपराध अत्यंत गंभीर और जघन्य प्रकृति का है, लेकिन इसे ‘दुर्लभतम में विरलतम’ श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, इसलिए मृत्युदंड उचित नहीं माना गया।
यह मामला वर्ष 2024 में कवर्धा थाना क्षेत्र में सामने आया था, जब वसुंधरा वैष्णव और उनकी पुत्री पार्वती वैष्णव के शव एक मकान में संदिग्ध परिस्थितियों में मिले थे। कमरे में सामान बिखरा हुआ था, अलमारी के शीशे टूटे थे और शवों के पास फिनाइल की गोलियां भी पाई गई थीं, जिससे हत्या की आशंका जताई गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि दोनों की मौत गला घोंटने से हुई थी और शरीर पर संघर्ष के निशान भी पाए गए थे, जिससे यह साबित हुआ कि घटना से पहले विरोध किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी अश्वनी पांडेय मृतका वसुंधरा वैष्णव के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था।
घटना के बाद उसका फरार हो जाना पुलिस के लिए बड़ा सुराग बना। तकनीकी और साइबर जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी को रायपुर रेलवे स्टेशन के पास एक होटल से गिरफ्तार किया था। उसके पास से स्कूटी भी बरामद की गई थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने घटना के बाद साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी। मौके से ताला काटने के औजार, दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद की गई, जिन्हें अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। अदालत ने कहा कि यह अपराध समाज के लिए गंभीर संदेश देता है, हालांकि इसे मृत्युदंड योग्य श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। आरोपी 27 फरवरी 2024 से न्यायिक हिरासत में है और यह अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। इस फैसले के साथ लंबे समय से चर्चित इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो गई है।
