रायपुर में अवैध प्लाटिंग का काला खेल: सरकारी और दूसरों की जमीनों पर भू-माफियाओं का कब्जा, रेरा और प्रशासन बेबस

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रायपुर । अवैध प्लाटिंग के प्रमुख इलाके: राजधानी रायपुर के रायपुरा, सेजबहार, कांदुल, भाटागांव, गोकुल नगर, बिलाल नगर, बोरियाखुर्द, डुंडा, मोतीनगर और बोरियाकला जैसे क्षेत्रों में धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग की जा रही है।

सरकारी व अन्य जमीनों पर कब्जा: बड़े बिल्डर और भू-माफिया नाले की जमीन, चारागाह, कोटवारी जमीन और अन्य सरकारी खाली जमीनों को भी नहीं छोड़ रहे हैं।

राजनीतिक संरक्षण और मिलीभगत: अवैध प्लाटिंग के इस कारोबार में राजनीतिक रसूख वाले लोगों और कुछ छुटभैये नेताओं की संलिप्तता सामने आ रही है, जिसके चलते निगम प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान लगते हैं।

रेरा की नाकामी: घर खरीदारों को बचाने के लिए बनाई गई संस्था ‘रेरा’ (RERA) के नियम-कायदे बिल्डरों पर बेअसर साबित हो रहे हैं, और इसके कुछ अधिकारियों पर बिल्डरों की मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं।

आम जनता की परेशानी: धोखे में आकर अवैध प्लाट या मकान खरीदने वाले आम लोग बाद में नगर निगम, पुलिस और अदालतों के चक्कर काटने को विवश हैं।

समाचार विवरण:
राजधानी रायपुर और उससे लगे आउटर इलाकों में अवैध प्लाटिंग का धंधा बेलगाम हो गया है। बिना अनुमति के कृषि भूमि, सरकारी जमीनों, चारागाह और नाले की जमीन पर कब्जा कर उसे प्लाट के रूप में भोले-भाले नागरिकों को बेचे जाने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

राजनीतिक रसूख का लाभ:
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवैध कारोबार में कई रसूखदार और सत्ता से जुड़े लोगों का हाथ होता है। स्थानीय स्तर पर पार्षद या उनके गुर्गे भी इस तरह के कृत्यों में संलिप्त पाए जाते हैं, जो अपनी पहुंच का धौंस जमाकर प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित करते हैं। हालांकि, नगर निगम द्वारा समय-समय पर अवैध निर्माण और सड़कों को काटने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन राजनीतिक दबाव और मिलीभगत के चलते कुछ ही दिनों बाद स्थिति फिर से जस की तस हो जाती है।

रेरा और कानून की स्थिति:
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आम जनता को ठगी से बचाने के लिए ‘रेरा’ का गठन किया गया था, लेकिन धरातल पर इसके नियम कमजोर साबित हो रहे हैं। राजधानी के कई बड़े बिल्डरों के खिलाफ रेरा में मामले लंबित हैं, बावजूद इसके मनमाने दाम पर फ्लैट और प्लाट बेचे जा रहे हैं।

कार्रवाई और चेतावनी:
प्रशासन अब आउटर इलाकों जैसे गोगांव, गोंदवारा, भनपुरी और सिलतरा आदि क्षेत्रों में मास्टर प्लान के विपरीत की जाने वाली प्लाटिंग पर कड़ी नजर रख रहा है। बिना अनुमति कृषि भूमि पर की गई प्लाटिंग और अवैध कब्जों को हटाकर उन जमीनों को पुनः ग्रीनलैंड या कृषि उपयोग के दायरे में बदलने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है।