सरस्वती का रौद्र रूप, पहाड़ों की खूबसूरती और ‘पहली चाय’-ऐसा है भारत का फर्स्ट विलेज माणा

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नई दिल्ली। हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसा उत्तराखंड का माणा गांव अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, पौराणिक मान्यताओं और अनोखी पहचान के लिए खास है। कभी इसे भारत का आखिरी गांव कहा जाता था, लेकिन अब इसे ‘भारत का पहला गांव’ कहा जाता है। बद्रीनाथ से करीब 3-4 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र बन चुका है।

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आखिरी से बना ‘पहला’ गांव:
भारत-तिब्बत सीमा के करीब बसे माणा को लंबे समय तक देश का अंतिम गांव माना जाता था। बाद में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर जोर देते हुए इसे ‘पहला गांव’ की पहचान दी गई। इसके बाद माणा की चर्चा देशभर में और बढ़ गई।

सरस्वती नदी का दिखता है विराट रूप:
माणा की सबसे खास चीजों में सरस्वती नदी भी शामिल है। मान्यता है कि यहां सरस्वती नदी का तेज और प्रचंड प्रवाह देखने को मिलता है। सरस्वती और अलकनंदा से जुड़े स्थलों के कारण यह क्षेत्र धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

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25 साल पुरानी ‘पहली चाय की दुकान’:
माणा की पहचान सिर्फ पहाड़ों और नदियों तक सीमित नहीं है। यहां की एक 25 साल से ज्यादा पुरानी चाय की दुकान भी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। कभी इसे देश की ‘आखिरी चाय की दुकान’ कहा जाता था, लेकिन गांव की नई पहचान के साथ अब यह ‘पहली चाय की दुकान’ के नाम से मशहूर है। यही वजह है कि, माणा में प्रकृति, आस्था और पहाड़ी चाय-तीनों का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

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