जल संकट से निपटने की दिशा में रायगढ़ ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले में 31 हजार से अधिक जल संरक्षण कार्यों में से लगभग 30 हजार पूरे हो चुके हैं। अब इसी सफलता के आधार पर प्रशासन ने जेएसजेबी 3.0 के तहत जल सुरक्षा को और मजबूत बनाने का लक्ष्य तय किया है।
रायगढ़। जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने के उद्देश्य से संचालित जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) 2.0 अभियान में रायगढ़ जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। 27 मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार जिले में विभिन्न विभागों और संस्थाओं के माध्यम से 31,157 जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन कार्य दर्ज किए गए। इनमें 29,947 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 1,210 कार्य प्रगतिरत हैं। अभियान की सफलता विभागीय समन्वय, ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी और स्थानीय स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है।
जिले में सबसे अधिक 22,906 कार्य जिला पंचायत के माध्यम से दर्ज किए गए, जिनमें 21,929 कार्य पूरे हो चुके हैं। इसके अलावा वन मंडल रायगढ़ ने 3,971, वन मंडल धरमजयगढ़ ने 2,342, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 1,185, नगर निगम ने 328 तथा जल संसाधन विभाग के रायगढ़ और धरमजयगढ़ संभाग ने क्रमशः 92 और 102 कार्य पूरे किए। विभिन्न विभागों की संयुक्त भागीदारी से जल संरक्षण को व्यापक स्तर पर गति मिली है।
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ग्राम स्तर पर वीबी-जीराम जी और मनरेगा के माध्यम से कुल 1,332 जल संरक्षण कार्य किए जा रहे हैं। इनमें 509 रिचार्ज पिट एवं सोक पिट, 92 लूज बोल्डर चेक डैम, 66 वर्षा जल संचयन संरचनाएं, 55 तालाब गहरीकरण, 36 ट्रेंच, 32 गैबियन संरचनाएं, 21 अर्थन गली प्लग, 36 सैंड फिल्टर, 251 पौधरोपण सहित अजीविका डबरी, नाला सफाई, नावा तरिया, परकोलेशन टैंक और अन्य संरचनात्मक कार्य शामिल हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
फिलहाल, जेएसजेबी 2.0 की सफलता के बाद अब रायगढ़ जिला जेएसजेबी 3.0 ‘कैच द रेन’ अभियान में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगा। इस चरण में नई संरचनाओं के निर्माण के साथ पुरानी जल संरचनाओं के संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि हर गांव जल संरक्षण की दिशा में आत्मनिर्भर बन सके।
