इस्लामाबाद। पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष की पहली वर्षगांठ पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक विवादास्पद बयान दिया है। रावलपिंडी में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए मुनीर ने इस टकराव को महज दो देशों की जंग न बताकर ‘दो विचारधाराओं की लड़ाई’ (मरका-ए-हक) करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की सैन्य रणनीति भारत के मुकाबले कहीं अधिक “बेहतर” थी, हालांकि उन्होंने अपने इन दावों के पक्ष में कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं किए।
यह विवाद पिछले साल 7 मई को शुरू हुआ था, जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था, जिसमें कम से कम 100 आतंकी मारे गए थे। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी सैन्य कार्रवाई की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने मुस्तैदी से नाकाम कर दिया। 10 मई 2025 को हॉटलाइन वार्ता के बाद युद्धविराम पर सहमति बनी थी। मुनीर ने अब दावा किया है कि भारत ने अमेरिका के जरिए युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, जिसे पाकिस्तान ने शांति के हित में स्वीकार किया। दूसरी ओर, भारत हमेशा से कहता रहा है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सीधे संवाद का परिणाम था।
अपने संबोधन में मुनीर ने भविष्य के युद्धों को “बहु-क्षेत्रीय” (multi-domain) बताते हुए नई पनडुब्बियों और रॉकेट फोर्स के जरिए सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने पाकिस्तान की रक्षा को ‘अभेद्य’ बताया। वहीं, भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा में उठाया गया कदम था। भारत ने संकल्प दोहराया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीमा पार आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करना जारी रखेगा।
