रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ विचारक मुकुल कानिटकर ने राष्ट्रीय कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। रायपुर में आयोजित एक राष्ट्रीय व्याख्यान कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि, समाज को ऐसे लोगों को सम्मान नहीं देना चाहिए, जो अपने स्वार्थ के लिए देश और व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं।
कार्यक्रम का आयोजन संघ के पूर्व सरसंघचालक स्व. कुप्पाहली सीतारामैया सुदर्शन की जयंती के अवसर पर किया गया था। अपने संबोधन में मुकुल कानिटकर ने कहा कि राष्ट्र का निर्माण हर व्यक्ति के योगदान से होता है। जैसे शरीर की सभी कोशिकाएं मिलकर शरीर को स्वस्थ रखती हैं, उसी तरह नागरिकों की जिम्मेदारी और कर्तव्य भावना देश को मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि, स्वार्थ की भावना बढ़ने से समाज में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। इससे निपटने के लिए समाज को गलत कार्यों को स्वीकार करने के बजाय उनका विरोध करना चाहिए।
कानिटकर ने संघ के उद्देश्य पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि, संघ का लक्ष्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज को संगठित और राष्ट्र को मजबूत बनाना है। उन्होंने पांच प्रमुख सामाजिक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए स्वदेशी, पारिवारिक संवाद, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय कर्तव्य को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में संघ पदाधिकारी डॉ. टोपलाल वर्मा और मुख्य अतिथि अनुराग पांडे ने भी नागरिक जिम्मेदारियों और सामाजिक सुधार की आवश्यकता पर विचार रखे।

