मलाला की किताब पर अहमदाबाद में बवाल, बयानों से गरमाई सियासत

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नई दिल्ली। अहमदाबाद के एक स्कूल में पाकिस्तानी मूल की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई की किताब पढ़ाए जाने को लेकर विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर अलग-अलग संगठनों और धार्मिक नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। देवभूमि रक्षा अभियान के संस्थापक स्वामी दर्शन भारती ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय स्कूलों में मलाला की किताब शामिल करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि देश की नई पीढ़ी को भारतीय महापुरुषों और राष्ट्रीय मूल्यों से जुड़े साहित्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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वहीं, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा कि किसी भी सामग्री को राष्ट्रहित और संविधान की कसौटी पर परखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और भगत सिंह जैसे महान व्यक्तित्वों की विरासत पहले से मौजूद है। दूसरी ओर, इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि किसी स्कूल में कौन-सी किताब पढ़ाई जाएगी, यह निर्णय स्कूल प्रशासन का अधिकार है और बाहरी हस्तक्षेप से बचना चाहिए। यह मामला अब शिक्षा, राष्ट्रवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस का विषय बन गया है।

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