कांकेर के टिकरापारा में सुबह 5 बजे तेंदुए की दस्तक से हड़कंप, CCTV में कैद हुई पूरी घटना; शहर में बढ़ती वन्यजीवों की आमद से दहशत
कांकेर। कांकेर शहर में जंगली जानवरों की लगातार बढ़ती दस्तक अब शहरवासियों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। 23 सितंबर की अलसुबह करीब 5 बजे टिकरापारा इलाके में एक तेंदुआ अचानक रहवासी क्षेत्र में पहुंच गया और एक घर में घुसकर वहां मौजूद पालतू कुत्ते को अपना शिकार बना लिया। तेंदुए की यह पूरी गतिविधि घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे मोहल्ले में दहशत का माहौल है।
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, अलसुबह तेंदुआ अचानक घर के परिसर में पहुंचा और कुछ ही देर में घर में मौजूद पालतू कुत्ते पर हमला कर दिया। सीसीटीवी फुटेज में तेंदुए की आवाजाही और हमले की घटना कैद हुई है। इससे एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर जंगल से निकलकर वन्यजीव शहर के रहवासी इलाकों के भीतर तक कैसे पहुंच रहे हैं।
घर की चौखट तक पहुंचा जंगल का शिकारी
कांकेर शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ समय से तेंदुआ और भालू जैसे जंगली जानवरों की मौजूदगी की सूचनाएं लगातार सामने आ रही हैं। वन्यजीवों के रहवासी क्षेत्रों में पहुंचने से लोगों में भय का माहौल है। पूर्व में भी वन्यजीवों के हमले में लोगों के घायल होने और जनहानि की घटनाओं के कारण ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के लोग अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
घटना की जानकारी मिलने के बाद कांकेर रेंज के रेंजर आशीष परिहार ने बताया कि मोहल्लेवासियों द्वारा तेंदुए के रहवासी क्षेत्र में घुसने की सूचना दी गई है। इसके आधार पर वन विभाग की टीम आसपास के क्षेत्रों में निगरानी कर रही है। लोगों को शाम के बाद और रात के समय सावधानी बरतते हुए आवाजाही करने की हिदायत दी गई है।
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वन विभाग के अनुसार संभावित एवं संदिग्ध स्थानों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि तेंदुआ अथवा अन्य जंगली जानवर दोबारा आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश न कर सकें।
निगरानी के बावजूद शहर में क्यों पहुंच रहे वन्यजीव?
वन विभाग द्वारा निगरानी किए जाने के बावजूद शहर और आसपास के गांवों में तेंदुआ तथा भालू की मौजूदगी की खबरें लगातार सामने आने से लोगों की चिंता बढ़ रही है। शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन और वन विभाग को लगातार वन्यजीवों की गतिविधियों की जानकारी दी जा रही है, लेकिन रहवासी क्षेत्रों में इनकी आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है।
लोगों का सवाल है कि आखिर जंगली जानवर बार-बार जंगल की सीमा छोड़कर आबादी और घरों तक क्यों पहुंच रहे हैं? यदि वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी हुई है तो संवेदनशील इलाकों में निगरानी, ट्रैकिंग और त्वरित रेस्क्यू की व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसकी भी समीक्षा जरूरी है।
शहरवासी बोले—अब अलसुबह और रात में भी डर
टिकरापारा की ताजा घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। यदि अलसुबह करीब 5 बजे तेंदुआ घर के भीतर तक पहुंच सकता है तो बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम घर से बाहर निकलने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। शहरवासियों ने वन विभाग से संवेदनशील इलाकों की पहचान कर नियमित गश्त, कैमरा ट्रैप, प्रभावी निगरानी और त्वरित रेस्क्यू व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है, ताकि वन्यजीव और इंसान दोनों सुरक्षित रह सकें।
23 सितंबर की अलसुबह हुई इस घटना ने एक बार फिर कांकेर शहर में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती को सामने ला दिया है।

