UN में भारत की सख्त ‘जवाबदेही के बिना बच्चों और स्कूलों की सुरक्षा अधूरी’

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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने सशस्त्र संघर्ष के दौरान बच्चों और शैक्षणिक संस्थानों पर बढ़ते हमलों को लेकर कड़ी चिंता जताई। भारत ने स्पष्ट कहा कि स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाने वालों को जवाबदेह ठहराए बिना उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। भारत ने दोहराया कि संघर्ष की परिस्थितियों में भी शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का मूल अधिकार है और इसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

‘जवाबदेही के बिना सुरक्षा अधूरी’
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पी. ने बुधवार को आयोजित सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा कि शिक्षा ऐसा अधिकार है, जो युद्ध और हिंसा के दौर में भी समाप्त नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सीखने, आगे बढ़ने और अपनी पूरी क्षमता हासिल करने का अवसर देना स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है।

राजदूत ने जोर देकर कहा कि भारत सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित बच्चों की सुरक्षा और उनके शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “जवाबदेही के बिना सुरक्षा अधूरी है। जो लोग बिना किसी डर के स्कूलों और बच्चों को निशाना बनाते हैं, उन्हें उनके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

बच्चों पर बढ़ते हमलों पर चिंता
यह बयान “सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित बच्चों की शिक्षा की रोकथाम और सुरक्षा को मजबूत करना: आदर्शवादी प्रतिबद्धताओं से प्रभावी कार्यान्वयन तक” विषय पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान दिया गया।

इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासचिव की हालिया रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया है कि 2025 में सशस्त्र संघर्ष के दौरान बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन चिंताजनक स्तर तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में बच्चे हिंसा, हमलों और शिक्षा से वंचित होने जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

भारत का स्पष्ट संदेश
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि केवल नीतिगत प्रतिबद्धताएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रभावी कार्रवाई और दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। भारत का मानना है कि बच्चों और स्कूलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक शांति, स्थिरता और भविष्य की पीढ़ियों के हित में सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक है।