नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस के साइबर थाने ने फर्जी आईजीएल (IGL) गैस कनेक्शन बंद होने का संदेश भेजकर लोगों के बैंक खातों से रकम उड़ाने वाले संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने कोलकाता से दो और झारखंड से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 20 मोबाइल फोन, कई डिजिटल डिवाइस, सोने-चांदी के सामान, नकदी और एक कार बरामद की गई है।
फर्जी मैसेज और APK फाइल से की ठगी
पश्चिमी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि एक पीड़ित को मोबाइल पर संदेश मिला, जिसमें दावा किया गया कि उसका आईजीएल गैस कनेक्शन जल्द बंद कर दिया जाएगा। सहायता के लिए दिए गए नंबर पर संपर्क करने पर ठगों ने व्हाट्सएप के जरिए एक APK फाइल भेजी और उसे इंस्टॉल करने के लिए कहा। एप डाउनलोड करते ही साइबर अपराधियों ने पीड़ित के मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर लिया और उसके बैंक खाते व क्रेडिट कार्ड से करीब 2.64 लाख रुपये निकाल लिए।
तकनीकी जांच से खुला पूरे नेटवर्क का राज
मामले की जांच के लिए साइबर थाना एसएचओ इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। जांच में पता चला कि पीड़ित के क्रेडिट कार्ड से दो मोबाइल फोन खरीदे गए थे, जिन्हें दिल्ली के शाहीन बाग स्थित फर्जी पते पर मंगाया गया था। IMEI नंबर, डिलीवरी एड्रेस और मोबाइल नंबरों के तकनीकी विश्लेषण से इस नेटवर्क के तार कोलकाता और झारखंड से जुड़े मिले।
पुलिस ने शाहीन बाग से एक सेल्सपर्सन को हिरासत में लिया, जिसके मोबाइल से कोलकाता स्थित साइबर अपराधियों के साथ व्हाट्सएप चैट मिली। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह कमीशन के बदले गिरोह के लिए पार्सल रिसीव कर कोलकाता भेजता था।
कोलकाता और झारखंड मॉड्यूल का खुलासा
जांच के दौरान कोलकाता के खिद्दरपुर हब से पार्सल लेने पहुंचे मो. साहिल और उसके साथी मो. रहीम की भूमिका सामने आई। दोनों फर्जी पहचान के जरिए साइबर ठगी से खरीदे गए मोबाइल प्राप्त कर उन्हें सस्ते दामों पर बेचते थे। पुलिस को इनके विदेश में बैठे हैंडलरों से भी संपर्क के संकेत मिले हैं।
इसके बाद झारखंड के देवघर से मो. मोहसिन और मो. दिलशाद को गिरफ्तार किया गया। जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह ऑनलाइन शॉपिंग, गिफ्ट कार्ड और कई बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर कर उसका स्रोत छिपाता था। अपराध से अर्जित धन को इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य चल संपत्तियों में बदलकर पुलिस की निगरानी से बचने की कोशिश की जाती थी।
