नईदिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समय भारत के महत्वपूर्ण दौरे पर हैं, जहाँ उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ नई दिल्ली में एक हाई-लेवल द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक के दौरान रुबियो ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को बेहद अहम बताते हुए कहा कि दोनों देश सिर्फ सामान्य साझेदार नहीं, बल्कि गहरे रणनीतिक सहयोगी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह साझेदारी किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सहयोग के नए अवसर खोलती है।
इस महाबैठक में दोनों नेताओं के बीच वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के कई जटिल मुद्दों पर खुलकर बात हुई। चर्चा में ईरान संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक ऊर्जा संकट, आतंकवाद, द्विपक्षीय व्यापार और हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की सुरक्षा जैसे विषय शामिल रहे। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के सामने प्रमुखता से वीजा का मुद्दा भी उठाया, जिसपर अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि हालिया नीतियां भारत को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं बनाई गई हैं। इसके अलावा, व्यापार समझौते को लेकर जल्द ही अमेरिकी टीम भारत का दौरा करेगी।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका एक व्यापक और वैश्विक साझेदारी साझा करते हैं, जो कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को प्रभावित करती है। चुनौतीपूर्ण समय में भी दोनों देश मजबूत साझेदार के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि मार्को रुबियो 26 मई को दिल्ली में होने वाली ‘क्वाड’ (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे, जहाँ हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता पर मुख्य फोकस रहेगा। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में टैरिफ, व्यापार और एच-1बी वीजा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद रहे हैं, लेकिन इस यात्रा को इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
