गुरु पूर्णिमा सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन देने वाले गुरुओं के प्रति सम्मान जताने का विशेष अवसर है। साल 2026 में यह पावन पर्व 29 जुलाई, बुधवार को मनाया जाएगा। आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस त्योहार का हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध और जैन परंपराओं में भी खास महत्व है। ‘गुरु’ शब्द का अर्थ ही अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला होता है। यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा को शिक्षकों, आध्यात्मिक गुरुओं और जीवन में सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शकों को समर्पित किया जाता है।
इस दिन को महर्षि वेद व्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। वे वेदों के संकलनकर्ता और महाभारत के रचयिता माने जाते हैं, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। बौद्ध धर्म में यह दिन भगवान बुद्ध के पहले उपदेश से जुड़ा है, जबकि जैन धर्म में इसे भगवान महावीर द्वारा अपने पहले शिष्य गौतम स्वामी को दीक्षा देने की स्मृति में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन लोग सुबह स्नान कर पूजा-पाठ करते हैं, मंदिरों में जाते हैं और अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेते हैं। छात्र अपने शिक्षकों को उपहार देकर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

