नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर छात्रों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका पर सवाल उठाने के दौरान उन्हें बोलने नहीं दिया गया। राहुल गांधी ने कहा, “माइक बंद कर सकते हैं, लेकिन छात्रों की गूंज नहीं।”
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने केवल दो संभावनाएं रखी हैं। उनके अनुसार, यदि छात्रों पर हुई कथित फायरिंग का आदेश गृह मंत्री ने दिया तो वह इसके लिए जिम्मेदार हैं, और यदि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी तो यह उनकी जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि वह इसी तर्क के आधार पर सवाल उठा रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश में “एग्जाम सिस्टम नहीं, बल्कि एक्सटॉर्शन सिस्टम” चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं में भारी रकम का लेन-देन होता है और इसका सबसे अधिक नुकसान ईमानदार छात्रों को उठाना पड़ता है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में निजी कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि शिक्षा व्यवस्था पर वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ा है।
लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण के दौरान उनके बयानों पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बिना किसी तथ्य के इस तरह के आरोप लगाना गलत है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर आपत्ति जताई और उन्हें कार्यवाही से हटाने की मांग की।
स्पीकर ने सदन में सभी सदस्यों से संसदीय मर्यादा का पालन करने और भाषा के चयन में संयम बरतने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी शब्द असंसदीय होंगे, उन्हें कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।
राहुल गांधी ने अपने बयान में छात्रों की समस्याओं, महंगी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उनके बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और नारेबाजी देखने को मिली। राहुल गांधी के आरोपों और सरकार की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
