फुटपाथ अब सिर्फ रास्ता नहीं, नागरिकों का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गाड़ियों पर पैदल यात्रियों को मिलेगी प्राथमिकता

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नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने फुटपाथ पर चलने वाले करोड़ों लोगों के अधिकार को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि, फुटपाथ पर सबसे पहला हक पैदल यात्रियों का है, न कि, वाहनों का। अदालत ने कहा कि, सुरक्षित तरीके से पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने सड़क हादसे से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि, संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत देश में स्वतंत्र रूप से आने-जाने का अधिकार मिलता है, जिसमें सुरक्षित फुटपाथ का इस्तेमाल भी शामिल है। मामला उस सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें एक पिता ने अपने पांच साल के बेटे को खो दिया था। हाईकोर्ट द्वारा मुआवजा कम किए जाने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 11,44,628 रुपये कर दी और दो महीने के भीतर भुगतान का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैदल यात्रियों के अधिकारों को लेकर मजबूत कानूनी व्यवस्था तैयार करने को कहा है। अदालत ने माना कि, मौजूदा मोटर वाहन कानून में पैदल चलने वालों के अधिकारों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि, सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। इस फैसले के बाद देशभर में फुटपाथ निर्माण, अतिक्रमण और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर नई दिशा तय होने की उम्मीद है।