1 से 3 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर तीन दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन, लोक वाद्यों की प्रस्तुतियां रहेंगी खास आकर्षण
रायपुर । छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नए अंदाज में प्रस्तुत करने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा ‘रंग तरंग’ नाम से तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। आयोजन 1 से 3 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से रायपुर के सिविल लाइंस स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर होगा।
‘रंग तरंग’ में प्रदेश की पारंपरिक लोकधुनों को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर दर्शकों के सामने पेश किया जाएगा। कार्यक्रम में विभिन्न लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियां और संगीत की अलग-अलग विधाओं का संगम देखने को मिलेगा।
लोक वाद्यों की धुन पर सजेगी संगीत की शाम
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण रहेंगी। लोक वाद्यों की पारंपरिक धुनों के साथ आधुनिक सुरों का मेल कार्यक्रम को एक अलग रंग देगा।आयोजकों के मुताबिक, ‘रंग तरंग’ का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं और संगीत परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना और उन्हें समकालीन प्रस्तुति के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है।
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स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच
कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश की विविध लोक संगीत शैलियों, वाद्य संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।खासकर युवाओं को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक जड़ों और लोक परंपराओं से जोड़ने में भी यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
परंपरा और आधुनिकता का अनूठा फ्यूजन
‘रंग तरंग’ में संस्कृति के पारंपरिक रंगों को आधुनिक संगीत की प्रस्तुति शैली के साथ पिरोया जाएगा। दर्शकों को जहां छत्तीसगढ़ की लोकधुनों और वाद्ययंत्रों की पहचान से रूबरू होने का मौका मिलेगा, वहीं आधुनिक सुरों के साथ उनका नया रूप भी देखने-सुनने को मिलेगा।
तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन रायपुरवासियों और कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए खास आकर्षण बनने जा रहा है। संस्कृति विभाग की यह पहल छत्तीसगढ़ की लोक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
