नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लेकर ऑटो सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। प्रस्तावित योजना के तहत अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन केवल इलेक्ट्रिक मॉडल के रूप में करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, क्रिसिल रेटिंग्स ने इसे सबसे बड़ी चुनौती बताया है, क्योंकि फिलहाल दिल्ली में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी काफी कम है।
क्रिसिल के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में दिल्ली में दोपहिया वाहनों की बिक्री में इलेक्ट्रिक मॉडल की हिस्सेदारी करीब 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ऐसे में वाहन कंपनियों को कम समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नए मॉडल तैयार करने और चार्जिंग नेटवर्क मजबूत करने की जरूरत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार की सब्सिडी और टैक्स छूट अहम भूमिका निभाएंगी। हालांकि, भविष्य में जब आर्थिक सहायता कम होगी, तब वाहन की कीमत, बैटरी लाइफ और चार्जिंग सुविधा ग्राहकों के फैसले में सबसे बड़े कारक बनेंगे। वहीं, चारपहिया वाहनों में बदलाव धीरे-धीरे होने की संभावना है, जबकि तीनपहिया वाहन सेगमेंट में इलेक्ट्रिक अपनाने की रफ्तार तेज रह सकती है। क्रिसिल का मानना है कि दिल्ली की EV नीति देश में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की बड़ी पहल है, लेकिन इसकी सफलता उद्योग की तैयारी और उपभोक्ताओं के भरोसे पर निर्भर करेगी।
