बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) द्वारा एक महिला आवेदक का रिटेल आउटलेट डीलरशिप का आशय पत्र (LOI) रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है। हालांकि, मामले की जांच में देरी और अधिकारियों की लापरवाही के कारण महिला को हुई मानसिक व आर्थिक परेशानी को देखते हुए कोर्ट ने एचपीसीएल को 1 लाख रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया है। मामले के अनुसार, एचपीसीएल ने वर्ष 2018 में ग्रामीण रिटेल आउटलेट डीलरशिप के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। याचिकाकर्ता अनंता चौधरी ने सरायपाली-पदमपुर रोड स्थित जमीन के आधार पर आवेदन किया था। जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद कंपनी ने दिसंबर 2020 में उनके पक्ष में लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी कर दिया।
एलओआई मिलने के बाद महिला ने सुरक्षा निधि जमा की, जिला प्रशासन से एनओसी प्राप्त की, जमीन का सीमांकन कराया, बैंक से ऋण लेकर निर्माण कार्य शुरू कराया और बिजली का ट्रांसफार्मर भी स्थापित कराया। लेकिन बाद में कंपनी ने यह कहते हुए नोटिस जारी किया कि संबंधित भूमि स्टेट हाईवे-16 पर स्थित है, जहां ग्रामीण श्रेणी का पेट्रोल पंप स्थापित नहीं किया जा सकता। महिला के जवाब से असंतुष्ट होकर एचपीसीएल ने फरवरी 2022 में एलओआई रद्द कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान माना कि ऑयल कंपनियों की नीति के अनुसार राष्ट्रीय या राज्य राजमार्ग पर ग्रामीण श्रेणी के रिटेल आउटलेट की अनुमति नहीं है, इसलिए एलओआई रद्द करने का निर्णय नियमों के अनुरूप था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि प्रारंभिक जांच समय पर और सही तरीके से की जाती तो महिला को अनावश्यक आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। इसी आधार पर कोर्ट ने एचपीसीएल को 1 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया।
