नई दिल्ली। भारत की एथलेटिक्स दुनिया में कई खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और जुनून से अलग पहचान बनाई है। उन्हीं में से एक हैं चित्रा के. सोमन, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी कड़ी मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाया। केरल के कोट्टायम में 10 जुलाई 1983 को जन्मी चित्रा को बचपन से ही दौड़ने का शौक था। स्कूल प्रतियोगिताओं से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गया। कोचों ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्होंने एथलेटिक्स को अपना करियर बना लिया। चित्रा ने 2004 एथेंस ओलंपिक में 4×400 मीटर रिले स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने टीम की साथी खिलाड़ियों के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
उनकी टीम ने यह रेस 3:26.89 मिनट में पूरी कर अपनी क्षमता साबित की। 2006 कॉमनवेल्थ गेम्स में चित्रा सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय रिले टीम का हिस्सा रहीं। इसके बाद 2007 एशियन ग्रां प्री में उन्होंने 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा। उन्होंने 51.30 सेकंड का समय निकालकर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। चित्रा के शानदार योगदान के लिए उन्हें 2007 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी कहानी आज भी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों से निकलकर बड़े सपने देखते हैं।
