छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को बड़ी राहत, 26 साल पुरानी बाधा खत्म; लेकिन रु.2000 करोड़ के नुकसान पर उठे सवाल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के लाखों पेंशनरों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत की खबर आई है। मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49(6) के तहत मध्यप्रदेश सरकार से सहमति लेने की बाध्यता खत्म होने से पेंशन और महंगाई राहत से जुड़े मामलों में अब तेजी आने की उम्मीद है। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ की छत्तीसगढ़ इकाई ने इस फैसले का स्वागत किया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने कहा कि 26 साल से चली आ रही प्रशासनिक परेशानी दूर हुई है, जिससे पेंशनरों को समय पर लाभ मिल सकेगा।

हालांकि, महासंघ ने धारा 49(6) को पूरी तरह खत्म करने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि, इस प्रावधान के कारण छत्तीसगढ़ सरकार को अभी भी हर साल करीब 2000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। महासंघ के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में छत्तीसगढ़ को मध्यप्रदेश के पेंशनरों की 26 प्रतिशत पेंशन देयता का भार उठाना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि, यह राशि राज्य के विकास कार्यों, कर्मचारियों और पेंशनरों के कल्याण के लिए उपयोग की जा सकती है। वीरेंद्र नामदेव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से केंद्र सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाकर धारा 49(6) के स्थायी समाधान की मांग की है।