रांची। झारखंड सरकार ने गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। राज्य के थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से जुड़े मामले में बिना सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के गलत रिपोर्ट भेजने के आरोप में विभाग की संयुक्त सचिव मनीषा जोसेफ तिग्गा और अवर सचिव संजय कुमार झा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कार्मिक प्रशासनिक एवं राजभाषा विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।
मामला राज्य के 606 थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस मामले में अधिकारियों ने सक्षम स्तर से अनुमोदन लिए बिना तथ्यों से अलग रिपोर्ट तैयार कर भेज दी। यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे को भेजी गई थी। बाद में रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद पुरानी रिपोर्ट को निरस्त कर नए सिरे से रिपोर्ट भेजने की स्थिति बनी। जानकारी के अनुसार, संयुक्त सचिव मनीषा जोसेफ तिग्गा पर आरोप है कि उन्होंने थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से संबंधित मामले में बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के वास्तविक तथ्यों से इतर रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे को भेज दी। इस रिपोर्ट के कारण विभाग को बाद में संशोधित प्रक्रिया अपनानी पड़ी।
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मनीषा जोसेफ तिग्गा के खिलाफ झारखंड सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली 2016 के तहत कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है। वहीं, अवर सचिव संजय कुमार झा पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आदेश के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वरीय अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे को अमिकस क्यूरी के रूप में नियुक्त किया है। सीसीटीवी लगाने की प्रगति और स्थिति को लेकर सभी राज्यों के गृह सचिवों और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई थी।
आरोप है कि बैठक में लिए गए निर्णय और उच्च अधिकारियों के निर्देश के बावजूद संजय कुमार झा ने अपने स्तर से सिद्धार्थ दवे के कार्यालय को ई-मेल के माध्यम से रिपोर्ट भेज दी। जबकि निर्देश था कि संबंधित रिपोर्ट सूचना, प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग से प्राप्त कर उपलब्ध कराई जाए। सरकार ने माना कि अधिकारी ने उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना की और संवेदनशील मामले में लापरवाही बरती। इसी आधार पर उन्हें निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान संजय कुमार झा को कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग में योगदान देने का आदेश दिया गया है।
गौरतलब है कि राज्य के 606 थानों में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना के लिए झारखंड सरकार ने जनवरी 2026 में प्रशासनिक मंजूरी दी थी। योजना की अनुमानित लागत करीब 134 करोड़ रुपये है।कैल्क्युलेटर और संदर्भ डिवाइस इस परियोजना के तहत राज्य के सभी चिन्हित थानों में कुल 8854 हाईटेक कैमरे लगाए जाने हैं। इन कैमरों में ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ-साथ नाइट विजन जैसी आधुनिक सुविधाएं भी होंगी। इसका उद्देश्य थानों में होने वाली गतिविधियों की निगरानी बढ़ाना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद देशभर के थानों में सीसीटीवी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में झारखंड में भी यह योजना लागू की जा रही है। हालांकि, रिपोर्ट भेजने में हुई कथित लापरवाही के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सरकार का कहना है कि संवेदनशील मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही काम करने के निर्देश दिए गए हैं। अब पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।
