नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर भारत और वियतनाम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए समुद्री और रक्षा सहयोग को और बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने रविवार को नई दिल्ली में वियतनाम के राष्ट्रीय रक्षा उपमंत्री वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल गुयेन ट्रुओंग थांग से मुलाकात की। यह बैठक दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हाल में हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के बाद हुई।
बैठक में भारत और वियतनाम के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने, क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने तथा दोनों देशों की ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने संयुक्त गतिविधियों को गति देने, प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। रक्षा सचिव और वियतनामी उपमंत्री ने समुद्री एवं रक्षा संबंधों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने कहा कि क्षेत्र में शांतिपूर्ण, स्थिर और नियम आधारित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग को लगातार मजबूत किया जाना आवश्यक है।
बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने पर जोर
बैठक में भारत और वियतनाम ने सुरक्षा से जुड़े जटिल मुद्दों से निपटने के लिए बहुपक्षीय मंचों पर आपसी समन्वय को महत्वपूर्ण बताया। दोनों पक्षों ने विशेष रूप से आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस के तहत सक्रिय भागीदारी के महत्व पर जोर दिया।भारत और वियतनाम ने आसियान के नेतृत्व वाले तंत्रों के माध्यम से व्यावहारिक रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने की अपनी साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई। दोनों पक्षों ने कहा कि आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस के विशेषज्ञ कार्य समूह जैसे सहयोगी मंच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और सामूहिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एयरो इंडिया 2027 के दौरान अगली रक्षा नीति वार्ता
दोनों पक्षों ने भारत में अगली रक्षा नीति वार्ता आयोजित करने पर भी सहमति जताई। यह वार्ता एयरो इंडिया 2027 के दौरान आयोजित की जाएगी। बैठक में रक्षा सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच संस्थागत संवाद को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। यह बैठक भारत और वियतनाम के बीच रक्षा संबंधों में बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करती है। साथ ही, यह दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान निर्धारित रणनीतिक दिशा के अनुरूप द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की दोनों देशों की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

