फर्जी ‘बैगा’ प्रमाण पत्र का बड़ा खेल! सरकारी नौकरियों में घोटाले के आरोप पर भड़का समाज

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गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरियां हासिल करने का मामला सामने आने के बाद बैगा समाज में भारी नाराजगी है। विशेष पिछड़ी जनजाति ‘बैगा’ के नाम पर कथित फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी सेवाओं में भर्ती होने के आरोपों को लेकर समाज के लोग बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और जांच की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन अर्चना पोर्ते और ‘नांगा बैगा जनशक्ति संगठन’ के नेतृत्व में किया गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि, बिलासपुर जिले के पोड़ी गांव सहित अन्य क्षेत्रों के कई लोगों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर ‘बैगा’ जनजाति के प्रमाण पत्र हासिल किए और सरकारी नौकरियों में नियुक्ति पा ली।

समाज के प्रतिनिधियों का दावा है कि, अब तक 55 लोगों की पहचान की गई है, जबकि जांच होने पर यह संख्या 150 से अधिक हो सकती है। आरोप है कि शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग, कृषि विभाग, हाईकोर्ट, आर्मी और BSF जैसे विभागों में भी ऐसे लोग कार्यरत हैं। बैगा समाज का कहना है कि सरकार ने इस विशेष जनजाति के युवाओं के लिए विशेष भर्ती प्रावधान बनाए हैं, लेकिन फर्जी प्रमाण पत्रों के कारण असली पात्र युवाओं का अधिकार छीना जा रहा है। समाज ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने का आश्वासन दिया है।