मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक: राज्यों को सप्लाई चेन दुरुस्त रखने के निर्देश, टीम इंडिया की भावना पर जोर बैठक में मुख्यमंत्री साय भी हुए शामिल

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। यह बैठक डिजिटल माध्यम से हुई। बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की गई। आदर्श आचार संहिता के कारण चुनावी राज्य इस बैठक में शामिल नहीं हुए। चुनावी राज्यों के मुख्य सचिवों के लिए एक अलग बैठक होगी, जो कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से की जाएगी।
प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि टीम इंडिया की भावना से मिलकर काम करने पर देश इस स्थिति से सफलतापूर्वक उबर जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकताएं आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग व आपूर्ति श्रृखंलाओं को मजूबत करना है। उन्होंने राज्यों से आपूर्ति श्रंखलाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने और जमाखोरी व मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में अग्रिम योजना बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया, खासकर उर्वरक भंडारण और वितरण की निगरानी में। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी स्तरों पर मजबूत समन्वय तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बदलते हालात में तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने सीमा और तटीय राज्यों में खास ध्यान देने का निर्देश दिया, ताकि नौवहन, आवश्यक आपूर्ति और समुद्री संचालन से जुड़ी नई चुनौतियों का समाधान किया जा सके। प्रधानमंत्री ने गलत सूचनाओं व अफवाहों से सतर्क रहने का भी आग्रह किया और सही व विश्वसनीय जानकारी फैलाने पर जोर दिया। बैठक में आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, पंजाब के भगवंत मान, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू सहित कई मुख्यमंत्री शामिल हुए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी इस बैठक में मौजूद थे।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से यह बैठक टीम इंडिया की भावना के तहत राज्यों और केंद्र के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री ने 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर हमले से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ इस तरह की बैठक की। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने खाड़ी पड़ोसी देशों और इजराइल पर हमले किए।

एक सूत्र ने बताया, प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और राज्यों की तैयारियों व योजनाओं की समीक्षा की। बैठक का फोकस ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत तालमेल सुनिश्चित करना था। आचार संहिता लागू होने के कारण चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए। कैबिनेट सचिवालय चुनाव वाले राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग बैठक करेगा।

वहीं, मुख्यमंत्रियों ने स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की सराहना की। उन्होंने वैश्विक अनिश्चितता के बीच ईंधन पर उत्पाद शुल्क कम करने और राज्यों को वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन बढ़ाने के फैसलों का स्वागत किया। मुख्यमंत्रियों ने भरोसा जताया कि उनके राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उलब्धता के कारण स्तिति स्थिर बनी हुई है। उसी दिन एक मीडिया कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भी चुनौतियां लगातार बढ़ती रही हैं और ऐसा कोई साल नहीं रहा जब भारत और भारतीयों की परीक्षा न हुई हो। लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के संयुक्त प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और चुनौतियों को टालने के बजाय सीधे उनका सामना कर रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ की अध्यक्षता में बनी समिति
ईरान-इस्राइल के बीच जंग जारी है। इसी बीच सरकार ने पश्चिम एशिया विवाद से पैदा होने वाले मामलों पर नजर रखने के लिए इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया है। इस ग्रुप की अगुवाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की कर रहे हैं। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ दूसरे मंत्री भी सदस्य हैं। ्रइस समिति के गठन से पहले संसद में पश्चिम एशिया संकट पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है, यह ग्रुप नियमित मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट में आने वाली हर दिक्कत का आकलन करता है और यह ग्रुप आवश्यक समाधान पर भी निरंतर काम करता रहा है।

भारत के पास 60 दिन का ईंधन

इससे पहले सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सरकार ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों पर ध्यान न देने की अपील की गई। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और अच्छी तरह प्रबंधित है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति अगले लगभग दो महीने के लिए पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल बाजार कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है।

हम युद्ध जैसे हालात का सामना कर रहे हैं

हम युद्ध जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की हमारी आपूर्ति प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य उत्पादों की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने अंतर मंत्रालयी प्रेसवार्ता के दौरान यह बात कही। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि भारत सरकार ने इस स्थिति को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए कई स्तरों पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। हमारे पास पर्याप्त कच्चा तेल भंडार है और अगले दो महीनों के लिए आपूर्ति की व्यवस्था है। एलपीजी और पीएनजी के मामले में भी स्थिति अनुकूल है।

देश में एलपीजी उत्पादन में 40 फीसदी का इजाफा हुआ

सरकार की ओर से बताया गया है कि हमारी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से या उससे भी अधिक क्षमता से चल रही हैं और घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 40त्न की वृद्धि हुई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार चूंकि भारत आयात पर अत्यधिक निर्भर है और एलपीजी आयात का लगभग 90त्न होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है- इसलिए सरकार ने वाणिज्यिक आपूर्ति के बजाय घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया। शुरुआत में वाणिज्यिक आपूर्ति रोक दी गई, फिर धीरे-धीरे बहाल की गई। पहले 20त्न, फिर पीएनजी विस्तार के लिए व्यापार में सुगमता के आधार पर अतिरिक्त 10त्न, बाद में बढ़ाकर 50त्न और अब 70त्न कर दी गई है। परिणामस्वरूप, लगभग 14 मार्च से अब तक 30,000 टन व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है।

प्रवासी श्रमिकों को 30,000 छोटे पांच किलो के सिलिंडर बांटे गए

पेट्रोलियम मंत्रालय की सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकार ने रेस्तरां, सडक़ किनारे के ढाबों, होटलों, औद्योगिक कैंटीनों और प्रवासी श्रमिकों को प्राथमिकता दी। आदेशों में इस्पात, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, रंग, रसायन और प्लास्टिक को भी प्राथमिकता देने का उल्लेख किया गया था। प्रवासी श्रमिकों को लगभग 30,000 छोटे पांच किलो के सिलेंडर वितरित किए गए… इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि भारत में पर्याप्त कच्चा तेल, पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। एलपीजी, एलएनजी और पीएनजी की आपूर्ति सुरक्षित है। कुछ स्थानों पर फैली अफवाहों के बावजूद, जिनके कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं, कोई कमी नहीं है। भले ही भारतीय कच्चे तेल की टोकरी की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढक़र 100 डॉलर से अधिक हो गई, सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी उत्पाद की कमी न हो। कई पड़ोसी देशों के विपरीत, जहां ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की गई है।