ब्रासीलिया/वाशिंगटन। ब्राजील और अमेरिका के बीच तनाव उस समय बढ़ गया जब अमेरिकी प्रशासन ने ब्राजील के दो बड़े आपराधिक संगठनों-कोमांडो वर्मेल्हो (CV) और प्रिमेरो कोमांडो दा कैपिटल (PCC)- को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद ब्राजील सरकार को आशंका है कि अमेरिका भविष्य में सुरक्षा के नाम पर उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है।
ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने संसद को भेजे पत्र में कहा कि अमेरिकी कदम देश की संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। उनका कहना है कि यदि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का हवाला दिया गया, तो अमेरिका सैन्य ऑपरेशन या अन्य हस्तक्षेप का रास्ता अपना सकता है, जैसा पहले कुछ देशों के मामलों में देखने को मिला है।
FTO सूची में शामिल संगठनों पर अमेरिका कड़े आर्थिक और कानूनी प्रतिबंध लागू करता है। वॉशिंगटन का तर्क है कि ये गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी, हथियारों की तस्करी और संगठित अपराध में शामिल हैं, जिससे अमेरिकी सुरक्षा हित प्रभावित होते हैं। हालांकि, ब्राजील सरकार का कहना है कि देश के भीतर कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसका आंतरिक विषय है और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के रिश्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
