एमसीबी/रायपुर। खेती में आधुनिक तकनीकों और उन्नत उर्वरकों का उपयोग किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के जनकपुर क्षेत्र के ग्राम कोटाडोल निवासी किसान शंकर यादव ने इस खरीफ सीजन में इफको नैनो डीएपी का उपयोग कर नई तकनीक को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, जनकपुर द्वारा समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराए जाने से उन्होंने पूरे उत्साह के साथ खरीफ फसल की तैयारी शुरू कर दी।
समिति के माध्यम से किसान शंकर यादव को इफको डीएपी (18:46) की 1 बोरी, इफको नैनो डीएपी की 1 बोतल, 2 बोरी नीम लेपित यूरिया तथा 30 किलोग्राम एमटीयू-1156 प्रमाणित धान बीज उपलब्ध कराया गया। समय पर बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता से उन्होंने खेतों की तैयारी कर निर्धारित समय पर बुवाई शुरू कर दी। शंकर यादव बताते हैं कि, इस बार उन्होंने पारंपरिक उर्वरकों के साथ इफको नैनो डीएपी का भी उपयोग करने का निर्णय लिया है। नैनो डीएपी कम मात्रा में फसल को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने वाली आधुनिक तकनीक पर आधारित उर्वरक है, जिससे पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है तथा संतुलित पोषण मिलने से फसल की बेहतर वृद्धि की उम्मीद रहती है।
उन्होंने कहा कि, सहकारी समिति के माध्यम से नैनो डीएपी आसानी से उपलब्ध होने से किसानों को नई तकनीक अपनाने का अवसर मिल रहा है। शंकर यादव ने राज्य सरकार एवं सहकारी समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और विशेष रूप से इफको नैनो डीएपी उपलब्ध कराए जाने से खेती की तैयारी आसान हुई है। इससे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ बेहतर उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
किसान शंकर यादव की यह कहानी बताती है कि, यदि किसानों को समय पर उन्नत कृषि आदान और आधुनिक उर्वरक उपलब्ध हों तो वे नई तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंच रही यह सुविधा न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायक है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
