डोंगरगढ़ में बोरतलाव ब्रिज की गुणवत्ता पर सवाल

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डोंगरगढ़। मानसून की पहली ही बारिश ने रेलवे विभाग द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए बोरतलाव ब्रिज की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ वर्ष पहले बने इस पुल में बारिश के बाद दो पिलरों के बीच का हिस्सा टूटकर बाहर निकल गया, जिससे पुल के बीचों-बीच बड़ा और खतरनाक गैप बन गया है। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, बीती रात हुई तेज बारिश के बाद ब्रिज का जॉइंट हिस्सा उखड़कर सड़क के बीच बाहर निकल आया। इससे मार्ग पर एक लंबा गैप बन गया, जिससे आवागमन कर रहे वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ गई। स्थानीय लोगों के अनुसार इसी क्षतिग्रस्त हिस्से की चपेट में आकर दो बाइक सवार घायल हो गए, जबकि रात करीब 9 बजे दो बड़े वाहन हादसे से बाल-बाल बच गए।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि वाहन चालकों ने समय रहते नियंत्रण नहीं संभाला होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि रेलवे विभाग और संबंधित ठेकेदार की ओर से काफी देर तक कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद स्थानीय पुलिस जवानों और ग्रामीणों ने मिलकर क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाया और अस्थायी रूप से मार्ग को सुरक्षित किया, ताकि यातायात आंशिक रूप से चालू रह सके।

रेलवे कंस्ट्रक्शन विभाग के सब इंजीनियर संजीत ने बताया कि पुल का निर्माण कार्य लगभग डेढ़ वर्ष पहले पूरा किया गया था और इसके रखरखाव की जिम्मेदारी डोंगरगढ़ आईओडब्ल्यू (इंस्पेक्टर ऑफ वर्क्स) के पास है। हालांकि उन्होंने निर्माण लागत को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए पुल में इतनी जल्दी तकनीकी खराबी सामने आती है, तो यह गंभीर लापरवाही का मामला है। लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय निगरानी की कमी के कारण ही ऐसी स्थिति बनी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और निरीक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में यह पुल किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्से के कारण इस मार्ग पर जोखिम बना हुआ है और लोगों को सावधानी से आवागमन करना पड़ रहा है। प्रशासन और रेलवे विभाग की ओर से स्थायी मरम्मत को लेकर अभी कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना न केवल निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि मेंटेनेंस व्यवस्था कितनी कमजोर है।