नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और अनियमित खानपान के कारण थायराइड की समस्या तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। यह बीमारी शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती है, जिससे वजन, ऊर्जा स्तर और हार्मोनल संतुलन पर असर पड़ता है। थायराइड मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है, हाइपोथायराइड और हाइपरथायराइड। दोनों स्थितियों में खानपान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
हाइपोथायराइड में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती, जिससे वजन बढ़ना, थकान, कब्ज और सुस्ती जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में जंक फूड, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ, ज्यादा चीनी और मीठे पेय पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। सोया उत्पादों का अधिक सेवन भी कुछ लोगों में दवा और हार्मोन के असर को प्रभावित कर सकता है। वहीं पत्तागोभी, फूलगोभी और ब्रोकली जैसी सब्जियों को कच्चा खाने के बजाय पकाकर सीमित मात्रा में लेना बेहतर माना जाता है।
वहीं हाइपरथायराइड में शरीर जरूरत से ज्यादा थायराइड हार्मोन बनाता है, जिससे दिल की धड़कन तेज होना, घबराहट, अधिक पसीना आना और तेजी से वजन कम होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस स्थिति में आयोडीन से भरपूर खाद्य पदार्थ, आयोडीन सप्लीमेंट, समुद्री शैवाल और ज्यादा कैफीन वाली चीजों का सेवन कम करना चाहिए। अत्यधिक मसालेदार और तले-भुने खाद्य पदार्थ भी लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार थायराइड मरीजों को संतुलित और पौष्टिक आहार पर ध्यान देना चाहिए। साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दालें, नट्स और बीज शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करते हैं। सेलेनियम, जिंक और आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ थायराइड के बेहतर कामकाज में मदद कर सकते हैं। इसके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नियमित व्यायाम करना और समय पर दवाएं लेना भी उतना ही जरूरी है। सही खानपान और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर थायराइड की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है।
