नई दिल्ली। देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शनिवार 13 जून को 158वें नियमित पाठ्यक्रम और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की भव्य पासिंग आउट परेड (POP) संपन्न हुई। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बतौर मुख्य अतिथि परेड की समीक्षा की और देश के सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने पर युवा सैन्य अधिकारियों को बधाई दी। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने परेड में शामिल नौ महिला कैडेटों की विशेष सराहना करते हुए इसे आईएमए के इतिहास का एक गौरवशाली क्षण बताया। उन्होंने कहा कि, यह भारतीय रक्षा बलों में महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक मील का पत्थर है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में अकादमी में विदेशी कैडेटों की उपस्थिति को वैश्विक मित्रता और शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। युवा अधिकारियों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि, वे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं, जिन पर 140 करोड़ से अधिक नागरिकों का अटूट विश्वास है। उन्होंने जोर देकर कहा कि, ‘सेवा ही सर्वोच्च कर्तव्य है।’
तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और जटिल वैश्विक परिवेश का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि, भारतीय सेना को हमेशा भविष्य के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से आजीवन सीखने की प्रवृत्ति अपनाने, साहसी निर्णय लेने और एक नैतिक लीडर बनने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि एक सैन्य अधिकारी के रूप में उनका उत्तरदायित्व केवल युद्ध जीतना नहीं, बल्कि अपने सैनिकों की भलाई और परिचालन दक्षता में संतुलन बनाकर उनका नेतृत्व करना है।
