कोरबा। जिले में पुलिस भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले एक आरक्षक को बालको थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। आरोपी की पहचान डिगम्बर प्रसाद कंवर के रूप में हुई है, जो कोरकोमा का रहने वाला है और राजनांदगांव में पदस्थ बताया जा रहा है। आरोपी पर आरोप है कि उसने पुलिस विभाग में अपनी प्रभावशाली पहुंच का झांसा देकर लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर रकम वसूली।
यह मामला बालको थाना क्षेत्र का है, जहां आरोपी ने गणेशी राठिया और उमाशंकर नामक दो व्यक्तियों से पुलिस भर्ती में चयन कराने के नाम पर कुल 1,25,000 रुपये की ठगी की। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने यह पूरी रकम अपने भाई के बैंक खाते में जमा करवाई थी, ताकि लेन-देन को छिपाया जा सके और किसी प्रकार की संदेह की स्थिति न बने।
पीड़ितों को लंबे समय तक न तो नौकरी मिली और न ही उनकी राशि वापस की गई। इसके बाद दोनों पीड़ितों ने बालको थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के बयान, बैंक लेन-देन और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया, जिसमें ठगी की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने आरक्षक डिगम्बर प्रसाद कंवर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में कई अहम तथ्य सामने आए, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी खुद को विभाग में अच्छी पहुंच रखने वाला बताकर लोगों को भरोसे में लेता था और नौकरी दिलाने का झांसा देकर पैसे ऐंठता था। पुलिस ने आरोपी के पास से एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जो इस मामले में साक्ष्य के रूप में उपयोग किए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपने पद और पहचान का दुरुपयोग कर लोगों को गुमराह किया। कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया है।
आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी राजनांदगांव पुलिस को दे दी गई है, क्योंकि आरोपी वहां पदस्थ था और उसके खिलाफ पहले भी कुछ कार्रवाई की बात सामने आई है। पुलिस अब इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि आरोपी ने इसी तरह के झांसे देकर अन्य लोगों से भी ठगी की हो सकती है। इसलिए उसके बैंक खातों, ट्रांजेक्शन डिटेल और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की गहन जांच की जा रही है।
एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी अकेले इस ठगी को अंजाम दे रहा था या फिर उसके साथ कोई और भी शामिल था। यदि नेटवर्क सामने आता है तो आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और पुलिस ने पूरे मामले को गंभीर आर्थिक अपराध के रूप में दर्ज किया है। जांच पूरी होने के बाद अन्य पीड़ितों की पहचान और नुकसान का आकलन भी किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले अक्सर सरकारी पहचान का दुरुपयोग करते हैं।
