एलआर स्पेशल: बस्तर में उगा ‘सोने से भी महंगा’ जापानी आम, क्या मियाज़ाकी लिखेगा किसानों की नई सफलता की कहानी?

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जगदलपुर। बस्तर की मिट्टी अब पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए वैश्विक कृषि मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रही है। दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले जापान के प्रसिद्ध मियाज़ाकी आम ने अब बस्तर की धरती पर सफलतापूर्वक फल देना शुरू कर दिया है। इसकी बाजार कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाखों रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, जिससे किसानों के बीच उत्साह बढ़ गया है। लाल रंग और बेहतरीन मिठास के लिए मशहूर मियाज़ाकी आम को जापान में ‘एग ऑफ द सन’ यानी ‘सूरज का अंडा’ कहा जाता है। बस्तर के एक प्रगतिशील किसान ने करीब चार साल पहले इस दुर्लभ किस्म का पौधा लगाया था। पूरी तरह जैविक तरीके से की गई देखभाल का नतीजा है कि, आज यह पेड़ फलों से लदा हुआ है। इससे यह साबित हुआ है कि बस्तर की जलवायु इस प्रीमियम विदेशी किस्म के लिए अनुकूल हो सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण पौधे और बेहतर मार्केटिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जाएं, तो मियाज़ाकी आम क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। इसकी खेती से पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक आय मिलने की संभावना है।हालांकि चुनौती सिर्फ उत्पादन की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और निर्यात व्यवस्था की भी है। ऐसे समय में, जब जापान ने हाल ही में भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाई है, बस्तर में तैयार हो रहा मियाज़ाकी आम एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। सही रणनीति और समर्थन मिलने पर यह आम किसानों की किस्मत बदलने के साथ बस्तर को वैश्विक फल बाजार में नई पहचान दिला सकता है।