दुर्ग। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में दुर्ग जिले का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। इस कमजोर परीक्षा परिणाम की वजहों को तलाशने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) अरविंद मिश्रा ने प्राचार्यों की एक अहम बैठक ली। समीक्षा के बाद खराब रिजल्ट देने वाले स्कूलों के प्राचार्यों से लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
प्राचार्यों की ओर से मिले जवाबों और विभागीय जांच में जो मुख्य तथ्य सामने आए हैं, वे सीधे तौर पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं की ओर इशारा करते हैं। दरअसल, सत्र के बीच में ही दुर्ग जिले के 194 व्याख्याताओं का प्राचार्य पद पर प्रमोशन कर दिया गया। भले ही इनकी नई पोस्टिंग नवंबर में हुई, लेकिन मानसिक रूप से वे पहले से ही नई जिम्मेदारी के लिए तैयार थे। इसके अलावा, युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) की नीति के कारण करीब 56 व्याख्याताओं का तबादला हुआ। इस तरह कुल 250 अनुभवी शिक्षक ऐन परीक्षा से पहले स्कूलों से हट गए, जिससे छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई।
जवाब देने वाले कई नए प्राचार्यों का यह भी कहना है कि जब उनकी नई पोस्टिंग हुई, तब परीक्षा का माहौल बन चुका था और उन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। इसके अलावा, पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान शिक्षकों का बार-बार प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) होना और एसआईआर (SIR) जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में उनकी संलिप्तता भी रिजल्ट बिगड़ने की बड़ी वजह बनी। कुल मिलाकर प्रशासनिक फेरबदल और उलझनों का सीधा असर बच्चों के भविष्य और बोर्ड के नतीजों पर साफ दिखाई दे रहा है।
