प्योंगयांग/सियोल। ईरान युद्ध में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके सलाहकारों की मौत ने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को इस कदर खौफजदा कर दिया है कि उन्होंने देश के संविधान में एक खौफनाक बदलाव कर दिया है। दक्षिण कोरियाई खुफिया एजेंसी (NIS) के मुताबिक, उत्तर कोरिया ने अब ‘ऑटोमैटिक न्यूक्लियर अटैक’ की नीति को लिखित संवैधानिक दर्जा दे दिया है। इसका मतलब है कि अगर किसी विदेशी हमले में किम जोंग उन की हत्या होती है या देश का कमांड सिस्टम ठप होता है, तो उत्तर कोरिया की परमाणु मिसाइलें बिना किसी मानवीय आदेश के अपने आप दुश्मन देशों पर हमला शुरू कर देंगी।


ईरान में इजरायल और अमेरिका की सर्जिकल स्ट्राइक और नेतृत्व को खत्म करने वाली रणनीति (Decapitation Strike) किम जोंग उन के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ साबित हुई है। किम को डर है कि आधुनिक तकनीक और सैटेलाइट के जरिए दुश्मन उनकी लोकेशन ट्रैक कर उन्हें निशाना बना सकते हैं। इसी डर को खत्म करने के लिए उन्होंने ‘डेड हैंड’ (Dead Hand) जैसी नीति अपनाई है,यानी “अगर मैं नहीं बचा, तो कोई नहीं बचेगा।”

अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाने के साथ-साथ किम जोंग ने दक्षिण कोरिया की सीमा पर नई आर्टिलरी और 155mm की खतरनाक गन भी तैनात कर दी है, जो सीधे सियोल को निशाना बना सकती है। उत्तर कोरिया ने अब अपने संविधान से दक्षिण कोरिया के साथ एकीकरण की बात हटाकर उसे ‘मुख्य दुश्मन’ घोषित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है, क्योंकि अब उत्तर कोरिया का परमाणु बटन किसी इंसान के हाथ में नहीं, बल्कि ‘खुद-ब-खुद’ चलने वाले एक आत्मघाती कानून के हाथ में है।


