चिलचिलाती गर्मी में बर्फ जैसा पानी, क्या आपकी प्यास सेहत पर भारी पड़ रही है?

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गर्मियों के मौसम में जब पारा 40 डिग्री के पार जाता है, तो फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी गले को तो सुकून देता है, लेकिन आपके शरीर के अंदरूनी तंत्र के लिए यह एक ‘शॉक’ की तरह हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों और आयुर्वेद के अनुसार, बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से हमारे शरीर की रक्त कोशिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिसका सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। यह न सिर्फ भोजन को पचाने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, बल्कि अचानक तापमान में बदलाव के कारण गले में खराश, साइनस और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं को भी न्योता देता है।

इसके विपरीत, कमरे के तापमान वाला या सामान्य पानी शरीर के लिए कहीं अधिक सहज और सुरक्षित है। चूंकि नॉर्मल पानी का तापमान हमारे शरीर के आंतरिक तापमान के करीब होता है, इसलिए इसे हमारा सिस्टम आसानी से सोख (Absorb) लेता है। यह भोजन के बाद मेटाबॉलिज्म को सुचारू बनाए रखने में मदद करता है और कब्ज जैसी परेशानियों से बचाता है।

अगर आपको ठंडा पानी पीने की बहुत इच्छा है, तो भारतीय परंपरा का सबसे बेहतरीन विकल्प ‘मटके का पानी’ है। मटका न केवल पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है, बल्कि इसके क्षारीय (Alkaline) गुण शरीर के pH संतुलन को भी बनाए रखते हैं। अंततः, धूप से आते ही तुरंत फ्रिज के पानी की जगह थोड़ा रुककर नॉर्मल या मटके का पानी पीना ही आपकी सेहत के लिए सबसे सही चुनाव है। गर्मी में प्यास बुझाना जरूरी है, लेकिन शरीर के प्राकृतिक तालमेल को बिगाड़कर नहीं।

दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, डॉ. नृपेन सैकिया की दी गई जानकारी के आधार पर यह साफ होता है कि दोनों तरह के पानी के अपने-अपने प्रभाव हैं। ठंडा पानी भले ही तुरंत ताजगी देता हो, लेकिन लंबी अवधि में और पाचन को दुरुस्त रखने के लिए नॉर्मल पानी एक बहुत ही संतुलित और बेहतरीन विकल्प है।

इसलिए, अगली बार जब आप प्यास बुझाने के लिए गिलास उठाएं, तो अपनी स्थिति और सेहत को ध्यान में रखकर ही पानी का चुनाव करें।