नई दिल्ली। आज – कल बिजी लाइफस्टाइल के चलते बहुत से लोग ग्रीन टी को सिर्फ़ वज़न घटाने वाला ड्रिंक समझते हैं। लेकिन ग्रीन टी के हेल्थ बेनिफिट्स इससे कहीं ज़्यादा हैं। ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनोल, खासकर कैटेचिन, शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होते हैं। ये दिल की सेहत को बेहतर बनाने और बीमारियों का खतरा कम करने में मदद करते हैं। साथ ही, L-थीनाइन की वजह से दिमाग का काम भी बेहतर होता है। खासकर, डायबिटीज़ वाले लोगों के लिए मीठी चाय की जगह ग्रीन टी पीना एक अच्छा ऑप्शन माना जाता है। रिसर्च बताती है कि ग्रीन टी ब्लड शुगर लेवल पर कैसे असर डालती है। ह्यूमन ट्रायल और मेटा-एनालिसिस के आधार पर, ग्रीन टी कई तरह से ग्लूकोज़ को कंट्रोल करने में मदद करती है। आपको बता दें की ग्रीन टी इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने में मदद करती है। इसमें मौजूद पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट EGCG सेल्स को इंसुलिन का अच्छे से इस्तेमाल करने में मदद करता है। इससे ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है। ग्रीन टी कार्बोहाइड्रेट के एब्ज़ॉर्प्शन को भी धीमा करती है। कैटेचिन खाने के बाद शुगर को तेज़ी से ब्लड स्ट्रीम में जाने से रोकते हैं। इससे शुगर लेवल में अचानक बढ़ोतरी कम होती है। इतना ही नहीं, ग्रीन टी शरीर में मैक्रोफेज सेल्स के काम को बेहतर बनाती है। ये मेटाबॉलिज़्म प्रोसेस में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर इन सेल्स का काम बेहतर होता है, तो ग्लूकोज़ बैलेंस भी बेहतर होता है। ग्रीन टी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। पुरानी सूजन से इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है। ग्रीन टी पीने से यह सूजन कम होती है और इंसुलिन का इस्तेमाल बेहतर होता है।
वहीं रिसर्च के मुताबिक, ग्रीन टी पीने से फास्टिंग शुगर लेवल कम करने में मदद मिलती है। यह भी पाया गया है कि HbA1c लेवल भी कम होता है। ये लंबे समय तक शुगर कंट्रोल के मुख्य इंडिकेटर हैं। ग्रीन टी कुछ हद तक वज़न कंट्रोल करने में भी मदद करती है। यह मेटाबॉलिज्म को थोड़ा बढ़ाकर और फैट बर्निंग प्रोसेस को बढ़ावा देकर टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने में फायदेमंद है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्रीन टी के इस्तेमाल में कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए। चीनी के साथ ग्रीन टी पीने से इसके फायदे कम हो जाते हैं। कुछ लोगों में, इसमें मौजूद कैफीन कुछ समय के लिए शुगर लेवल बढ़ा सकता है या नींद में खलल डाल सकता है। इसका कुछ दवाओं (ब्लड थिनर, बीटा ब्लॉकर्स) पर बुरा असर पड़ सकता है। यह आयरन एब्जॉर्प्शन पर भी असर डाल सकता है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि दिन में 3-4 कप तक ग्रीन टी पीना काफी है। हालांकि, ज़्यादा पीने की सलाह नहीं दी जाती है। इसे बिना चीनी या स्वीटनर मिलाए पीना सबसे अच्छा है। ग्रीन टी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद कर सकती है। लेकिन यह पूरे इलाज का विकल्प नहीं है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बैलेंस्ड डाइट और डॉक्टर की सलाह ज़रूर मानें।
