नई दिल्ली। ऑनलाइन खाना मंगाने वालों के लिए आने वाले दिन महंगे साबित हो सकते हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब सीधे फूड डिलीवरी सेक्टर पर दिखाई देने लगा है। माना जा रहा है कि,स्विगी और ज़ोमैटो जल्द ही ग्राहकों पर अतिरिक्त डिलीवरी चार्ज का बोझ डाल सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे डिलीवरी कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिलीवरी पार्टनर्स भी बढ़ती ईंधन लागत के चलते ज्यादा इंसेंटिव और मेहनताना मांग सकते हैं।
फिलहाल क्विक-कॉमर्स ऑर्डर की डिलीवरी पर कंपनियों का औसत खर्च 35 से 50 रुपये तक है, जबकि फूड डिलीवरी पर यह खर्च 55 से 60 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंचता है। अनुमान है कि, कुल डिलीवरी कॉस्ट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ ईंधन पर खर्च होता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में ग्राहकों को ज्यादा डिलीवरी फीस, प्लेटफॉर्म चार्ज और सर्ज प्राइसिंग का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार,स्विगी पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है, जबकि ज़ोमैटो अपने मजबूत कस्टमर बेस और विज्ञापन कमाई की वजह से बेहतर स्थिति में दिखाई दे रही है।
