नम आंखों से मावली माता की डोली को दी विदाई, 75 दिनों के बस्तर दशहरा का हुआ समापन

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ की आस्था, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा 75 दिनों तक चले उत्सव के बाद अंतिम रस्म के साथ संपन्न हो गया। जगदलपुर के गीदम रोड स्थित जिया डेरा मंदिर में मावली माता की डोली विदाई की रस्म विधि-विधान से पूरी की गई। इस दौरान पूजा-अर्चना, विशाल कलश यात्रा और गाजे-बाजे के बीच श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता को विदाई दी।परंपरा के अनुसार, बस्तर के राजा अन्नम देव के समय से ही मावली माता की डोली विदाई की रस्म निभाई जाती रही है। पहले यह आयोजन सादगी से होता था, लेकिन वर्ष 2006 में तत्कालीन कमिश्नर जीएस मिश्रा की पहल पर इसे भव्य रूप दिया गया। इसके बाद से डोली विदाई उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।

इस वर्ष भी बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव, माटी पुजारी और स्थानीय लोगों ने माता की पूजा-अर्चना की। विशाल कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान मावली माता की डोली को बंदूक से सलामी दी गई और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ दंतेवाड़ा के लिए विदा किया गया।बस्तर दशहरा के दौरान मावली परघाव की रस्म में माता की डोली का भव्य स्वागत किया जाता है। इसके बाद डोली को मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर में रखा जाता है, जहां श्रद्धालु दर्शन करते हैं। डोली विदाई की अंतिम रस्म के साथ ही बस्तर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा 75 दिनों का ऐतिहासिक पर्व संपन्न हो गया।