नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के हालातों ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को पूरी तरह हिला दिया है, जिससे भारत पर भी बड़ा तेल संकट मंडराने लगा था। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ जलमार्ग पर निर्भर है, जो मौजूदा सुरक्षा संकट के कारण बेहद असुरक्षित हो चुका है। भारत ने सात साल बाद अप्रैल में ईरान से दोबारा तेल आयात शुरू किया था, लेकिन अमेरिकी नौसेना की कड़ी घेराबंदी के चलते इस महीने एक भी ईरानी कार्गो भारत नहीं पहुँच सका। इस संकट का असर सऊदी अरब से होने वाली सप्लाई पर भी पड़ा, जो 6.7 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर महज 3.4 लाख बैरल रह गई है। हालात इस कदर गंभीर हैं कि खाड़ी क्षेत्र में 13 भारतीय जहाज बीच समंदर में फंसे हैं और हाल ही में ओमान के पास एक भारतीय जहाज पर हुए हमले के बाद वह डूब गया।
खाड़ी में मचे इस हाहाकार और जहाजों पर बढ़ते खतरों के बीच वेनेजुएला भारत के लिए सबसे बड़ा तारणहार बनकर उभरा है। ताजा एनर्जी ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, वेनेजुएला ने संकट की इस घड़ी में भारत को होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई में एक झटके में करीब 50 फीसदी का भारी उछाल कर दिया है। इसके साथ ही वेनेजुएला अब रूस और इराक के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर देश बन गया है। ऐसे नाजुक समय में जब पारंपरिक खाड़ी देशों से आपूर्ति बाधित हो रही है, वेनेजुएला से मिला यह मजबूत सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में गेम-चेंजर साबित हो रहा है।
