चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत में नई सरकार के गठन के बाद से ही सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। छोटी-छोटी पार्टियों के बैसाखी के भरोसे चल रही अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री थलपति विजय की सरकार पर अब गिरने का खतरा मंडराने लगा है। ‘तमिझगा वेत्री कझगम’ (TVK) सरकार को कुछ दिन पहले वीसीके (VCK) ने आंखें दिखाई थीं, तो अब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने समर्थन वापसी की खुली धमकी दे डाली है। माकपा के वरिष्ठ नेता शनमुगम ने सीएम विजय को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर सरकार चलाने के लिए विपक्षी दल एआईएडीएमके (AIADMK) को कैबिनेट में शामिल किया गया या उनसे गठजोड़ किया गया, तो वामपंथी दल अपना समर्थन तुरंत वापस ले लेंगे।
माकपा नेता शनमुगम ने सीएम विजय को उनके चुनावी वादों की याद दिलाते हुए कहा कि तमिलनाडु की जनता ने इस बार डीएमके (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) दोनों के खिलाफ जाकर टीवीके को एक नया और साफ-सुथरा जनादेश दिया था। विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान ‘क्लीन गवर्नेंस’ और भ्रष्टाचार मुक्त विकल्प देने का वादा किया था। ऐसे में अगर वे सरकार बचाने के लिए AIADMK के नेताओं को कैबिनेट में मंत्री पद देते हैं, तो यह सीधे तौर पर जनता के साथ धोखा होगा।

दरअसल, 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है। हालिया चुनावों में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला; विजय की पार्टी TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि DMK को 59 और AIADMK को 47 सीटें मिलीं। विजय ने कांग्रेस, पीएमके, माकपा और वीसीके जैसी छोटी पार्टियों के बाहरी सहयोग और अन्नाद्रमुक से टूटे 24 विधायकों के दम पर सरकार बनाई थी। लेकिन अब सहयोगियों के इस कड़े रुख से विजय सरकार की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं।
