आयुष्मान योजना में करोड़ों के फर्जीवाड़े का शक, दुर्ग के निजी अस्पताल जांच के घेरे में

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि ओडिशा से मरीजों को एजेंटों के माध्यम से लाकर सामान्य बीमारियों के मामलों में अधिक भुगतान वाले सर्जिकल पैकेज का दावा किया जा रहा था। मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। शिकायत मिलने पर दुर्ग सीएमएचओ डॉ. मनोज दानी के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच दल ने 22 और 23 जून को एसआर हॉस्पिटल (चिखली), एएम हॉस्पिटल (चरोदा), सूरज नर्सिंग होम, भिलाई नर्सिंग होम और नवजीवन हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। टीम ने ओपीडी, आईपीडी और आयुष्मान योजना के तहत भर्ती मरीजों के रिकॉर्ड की जांच की।

जांच के दौरान कई मरीज ओडिशा की गोपबंधु जन आरोग्य योजना के लाभार्थी पाए गए। अधिकारियों ने यह भी जांच की कि सामान्य बीमारी के मामलों में महंगे सर्जिकल पैकेज क्यों स्वीकृत किए गए और बड़ी संख्या में मरीजों की सर्जरी की आवश्यकता कैसे पड़ी। जांच रिपोर्ट के अनुसार, चिखली स्थित एसआर हॉस्पिटल में 60 से 70 ओडिशा निवासी मरीज भर्ती मिले। अस्पताल में ओड़िया भाषा जानने वाली स्टाफ नर्स की नियुक्ति की जानकारी भी सामने आई। एएम हॉस्पिटल, लक्ष्मीनारायण हॉस्पिटल और नवजीवन हॉस्पिटल में भी ओडिशा के मरीज भर्ती पाए गए।

पड़ताल में यह भी सामने आया कि ओडिशा के बरगढ़, कोरापुट, नुआपाड़ा, संबलपुर और बोलांगीर समेत कई जिलों से एजेंट मरीजों को अस्पतालों तक लाते हैं। आरोप है कि प्रत्येक मरीज पर एजेंटों को तीन से चार हजार रुपये तक का कमीशन दिया जाता है। साथ ही कुछ लोगों को प्रतिदिन 300 से 500 रुपये का प्रलोभन देकर भर्ती कराने के भी आरोप लगे हैं। जांच के दौरान कुछ कथित एजेंटों ने कैमरे पर मरीज लाने के एवज में मिलने वाले कमीशन को लेकर भी दावा किया। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा है कि यदि जांच में सामान्य बीमारी के मामलों में अधिक भुगतान वाले आयुष्मान पैकेज लेने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है।