नई दिल्ली। देश में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और आतंक पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय ने डॉग लवर्स और एनजीओ (NGO) की उन सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी से जुड़े पुराने सख्त निर्देशों को वापस लेने की मांग की गई थी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि, सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश नहीं बदलेगा और जो अधिकारी इन निर्देशों का पालन करने में लापरवाही बरतेंगे, उन पर कोर्ट की अवमानना का मुकदमा चलाया जाएगा।
जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इस मामले पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा, “देश में मासूम बच्चों और बुजुर्गों को कुत्ते काट रहे हैं, हम ऐसी भयानक स्थिति से अपनी आंखें नहीं मूंद सकते। यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन से जुड़ा है।” सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश और सख्त गाइडलाइंस अदालत ने साल $2025$ के अपने पुराने फैसले को बरकरार रखते हुए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं, खतरनाक कुत्तों को राहत नहीं, गंभीर रूप से बीमार और बेहद हिंसक या आक्रामक हो चुके कुत्तों को इंजेक्शन देकर दर्दरहित मौत (Euthanasia) देने पर विचार किया जाए।
शेल्टर होम और एबीसी फ्रेमवर्क: सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) फ्रेमवर्क का कड़ाई से पालन करें और हर शहर में नसबंदी व टीकाकरण केंद्र स्थापित किए जाएं।सार्वजनिक जगहों की सफाई, अस्पताल, पार्क और रेलवे स्टेशनों जैसे भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम भेजा जाए।हाईवे से मवेशी हटेंगे: नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) को आदेश दिया गया है कि वे हाईवे से आवारा मवेशियों को हटाकर गौशालाओं में भेजें ताकि सड़क हादसे रुक सकें।17 नवंबर को कटेगा रिपोर्ट कार्ड। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस मामले पर आगे की सुनवाई बंद कर दी है और सभी राज्यों को $17$ नवंबर तक अपनी कंप्लायंस (अनुपालन) रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है। आदेश का पालन करा रहे अधिकारियों के काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
