ओडिशा में सक्रिय चार माओवादी कैडर सहित पश्चिम बस्तर संभाग के दो माओवादियों ने छोड़ी हिंसा, पुनर्वास नीति के तहत मिलेंगी सुविधाएं
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। ओडिशा में सक्रिय चार माओवादी कैडरों और पश्चिम बस्तर संभाग के संगठन से अलग होकर फरार चल रहे दो माओवादियों सहित कुल छह लोगों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया। सभी ने जिला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इस दौरान जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और बीजापुर पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में चार पीपीसीएम और दो पीएम रैंक के कैडर शामिल हैं। इन सभी पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था।.
पुलिस के मुताबिक, छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, लगातार चलाए जा रहे माओवादी विरोधी अभियानों और कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रभावित होकर इन माओवादियों ने संगठन छोडऩे का निर्णय लिया। सुरक्षा बलों की बढ़ती सक्रियता, संगठन में कमजोर होती स्थिति और हिंसक विचारधारा से मोहभंग भी आत्मसमर्पण के प्रमुख कारण बताए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि पूर्व माओवादियों के पुनर्वास, आदिवासी क्षेत्रों में जारी विकास कार्यों और समाज की मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जीने के अवसरों ने भी इन कैडरों को प्रभावित किया।
आत्मसमर्पण करने वालों में चार पर आठ-आठ लाख का इनाम
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में शामिल हैं—
- रानी सोढ़ी उर्फ संध्या: पीपीसीएम, आठ लाख रुपये का इनाम।
- पांडो पोडिय़म उर्फ सस्मिता: पीपीसीएम, आठ लाख रुपये का इनाम।
- सुक्कू कुडिय़म उर्फ संतोष: पीपीसीएम, आठ लाख रुपये का इनाम।
- कोसा माड़वी उर्फ सतीश: पीपीसीएम एवं ए-सेक्शन कमांडर, आठ लाख रुपये का इनाम।
- देवे मड़कम उर्फ जन्नी: पीएम रैंक, दो लाख रुपये का इनाम।
- लालू ताती: पीएम रैंक, एक लाख रुपये का इनाम।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले कुछ माओवादी लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे। रानी सोढ़ी उर्फ संध्या वर्ष 2012 से संगठन से जुड़ी थी और बाद में ओडिशा की कंपनी नंबर आठ में पीपीसीएम के पद पर कार्यरत रही। पांडो पोडिय़म उर्फ सस्मिता ने वर्ष 2015 में संगठन में प्रवेश किया था। दिसंबर 2025 में उसे पीपीसीएम की जिम्मेदारी दी गई थी।
सुक्कू कुडिय़म उर्फ संतोष वर्ष 2005 से संगठन में सक्रिय था और बाद में ओडिशा में वरिष्ठ माओवादी कैडरों की सुरक्षा में तैनात रहा। कोसा माड़वी उर्फ सतीश कंपनी नंबर दो में पीपीसीएम और ए-सेक्शन कमांडर के रूप में काम कर रहा था। वहीं, देवे मड़कम उर्फ जन्नी ओडिशा में कंपनी नंबर आठ के साथ काम कर चुकी थी, जबकि लालू ताती गंगालूर क्षेत्र समिति से जुड़ा था।
पुलिस द्वारा जारी विवरण में इन कैडरों की विभिन्न मुठभेड़ों, सुरक्षा बलों के शिविरों पर हमलों और अन्य माओवादी गतिविधियों में कथित संलिप्तता का भी उल्लेख किया गया है। छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को नियमानुसार आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से उन्हें स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी देने के साथ समाज में सम्मानजनक जीवन शुरू करने के लिए मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।
इस आत्मसमर्पण में जिला रिजर्व गार्ड, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 170वीं बटालियन और बीजापुर पुलिस के बीच समन्वय की अहम भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों, संपर्क और विश्वास निर्माण की पहल से माओवादी कैडरों को हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस के मुताबिक, छह माओवादियों का आत्मसमर्पण क्षेत्र में माओवादी संगठन पर बढ़ते दबाव और शासन की पुनर्वास नीति के प्रति विश्वास का संकेत है।

