संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई जारी रहेगी:राहुल गांधी
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कथित मतदाता धोखाधड़ी के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई लंबी चलेगी। युवाओं से संवाद करते हुए उन्होंने कहा, देश की रक्षा में लंबा समय लगेगा। हमें रोज रोका जाएगा, लेकिन रुकना नहीं है और हर दिन लड़ाई लडऩी है, क्योंकि सच हमारे साथ है।
इंदिरा भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए शुरू हुआ प्रतिरोध किसी एक दिन का आंदोलन नहीं है, बल्कि वर्षों से चल रही लड़ाई का व्यापक रूप है। उन्होंने कहा कि जब तक संविधान की रक्षा सुनिश्चित नहीं होती, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद से नहीं हटते, चुनावी व्यवस्था में सुधार नहीं होता और लोगों को न्याय नहीं मिलता, तब तक देश के युवा पीछे नहीं हटेंगे।
राहुल गांधी ने आंदोलनकारी युवाओं को रोके जाने की कड़ी निंदा करते हुए सवाल किया कि देश की राजधानी को जेल में क्यों तब्दील कर दिया गया है और लोगों को दिल्ली आने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली को किले में बदल दिया गया है और करीब 30 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की रणनीति अलग है। विपक्ष जनता को यह दिखाना चाहता है कि दिल्ली की किलेबंदी के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने का प्रयास कर रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनावों में कथित धांधली को लेकर सवाल पूछने के कारण विपक्ष और युवाओं को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की किलेबंदी से जनता की आवाज नहीं दबाई जा सकती।
कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्ष लोगों का विश्वास जीतने के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उद्योगपति गौतम अडानी, मुकेश अंबानी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के लिए अनुकूल है, लेकिन देश के आम नागरिकों के हितों के लिए खतरनाक है। उन्होंने लोगों से ऐसी स्थिति को रोकने की अपील की।
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राहुल गांधी ने दावा किया कि मौजूदा हालात से सुरक्षाकर्मी भी परेशान हैं और लगभग 50 प्रतिशत सुरक्षाकर्मी विपक्ष के आंदोलन को सही मानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों से युवाओं के खिलाफ कार्रवाई कराई जा रही है, जबकि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कुछ लोग खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट किए जाने के आरोप भी लगाए।
राहुल गांधी ने देशवासियों से किसी न किसी रूप में आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने आंदोलन की तुलना भगवान शिव के तांडव और उनकी बारात से करते हुए कहा कि इसमें हर व्यक्ति शामिल हो सकता है। यह पूछे जाने पर कि आंदोलन का उद्देश्य क्या है, राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को हटाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी हटाना आंदोलन का लक्ष्य है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के उनसे संपर्क करने संबंधी सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि संदेश आते हैं और ज्ञानेश कुमार उनकी संवाददाता वार्ता देख रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने लाखों लोगों के मताधिकार छीनने में भूमिका निभाई है और वे इससे बच नहीं सकते। राहुल गांधी ने दावा किया कि कांग्रेस के पास उनके अतीत और कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारियां हैं।
उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे मुख्य अपराधी नहीं हैं और उन्हें देश के हित में इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बन जाना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें माफ करने के बारे में भी विपक्ष विचार कर सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजीत डोभाल और गौतम अडानी ने ज्ञानेश कुमार पर दबाव बनाया है। ये सभी आरोप राहुल गांधी ने अपने बयान में लगाए।
एक अन्य सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि इस मुद्दे पर चल रहे सभी आंदोलन एकजुट हैं और कोई समानांतर प्रदर्शन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि विचार एक है और भारत आगे बढ़ रहा है। संविधान की रक्षा के लिए जो भी खड़ा है, विपक्ष उसके साथ है, उसका समर्थन करेगा और उसकी रक्षा करेगा।
राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर भारतीय लोकतंत्र और चुनावों की निष्पक्षता को लेकर गहरी चिंता जताई है। उनके अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने जवाब में याचिका दाखिल करने का रास्ता सुझाया है।
आंदोलनकारी युवाओं से सीधे संवाद के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार के 200 से अधिक अधिकारी कांग्रेस के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और विदेश मंत्रालय के भीतर से पार्टी को लगातार जानकारियां मिल रही हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में संवाददाता सम्मेलन के दौरान कोई विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख नहीं है।

