नई दिल्ली। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित को देश की प्रमुख घरेलू खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का नया निदेशक नियुक्त किया गया है। तेलंगाना कैडर के 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी दीक्षित ऐसे समय में एजेंसी की जिम्मेदारी संभालेंगे, जब देश आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी कई गंभीर और जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनके नाम को मंजूरी दी है। वे मौजूदा आईबी निदेशक का कार्यकाल पूरा होने के बाद पदभार ग्रहण करेंगे। उनकी नियुक्ति को सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
महेश दीक्षित का खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों में लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में इंटेलिजेंस ब्यूरो की सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) का नेतृत्व किया है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद उस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। अधिकारियों के अनुसार, दीक्षित ने अपने करियर में आतंकवाद-रोधी अभियानों, वामपंथी उग्रवाद और सीमा पार घुसपैठ से जुड़े कई संवेदनशील मामलों पर काम किया है। उन्हें जमीनी स्तर पर मजबूत खुफिया नेटवर्क तैयार करने के लिए भी जाना जाता है।
जम्मू-कश्मीर में उनके अनुभव को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वर्तमान समय में देश आतंकवाद, कट्टरपंथ और नार्को-टेरर नेटवर्क जैसी चुनौतियों से निपट रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में उनका अनुभव आईबी की रणनीति को और प्रभावी बनाने में मदद करेगा। सूत्रों के अनुसार, नई जिम्मेदारी के तहत महेश दीक्षित का फोकस खुफिया तंत्र को और मजबूत करने, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने और उभरते सुरक्षा खतरों पर समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करने पर रहेगा।
आईबी देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण एजेंसी मानी जाती है, जो आतंकवाद, उग्रवाद, साइबर खतरों और अन्य संवेदनशील सूचनाओं पर नजर रखती है। ऐसे में नए निदेशक के रूप में दीक्षित के सामने कई बड़ी जिम्मेदारियां होंगी। उनकी नियुक्ति को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत की आंतरिक सुरक्षा रणनीति में तकनीक आधारित निगरानी और खुफिया सूचना एकत्रीकरण पर और अधिक जोर देखने को मिल सकता है। महेश दीक्षित के नेतृत्व में एजेंसी से यह उम्मीद की जा रही है कि वह बदलते सुरक्षा परिदृश्य में नई चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करेगी और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी।
