नई दिल्ली। लोकसभा में पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर हुई लंबी चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन का नतीजा बताया। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों युवाओं के दबाव के कारण सरकार को झुकना पड़ा और अब सरकार को आंदोलन के दौरान किए गए सभी आश्वासन भी सार्वजनिक करने चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा कि वह शुरू से इस आंदोलन को देख रहे थे। उनके मुताबिक, आंदोलन के बाद एक नारा सबसे ज्यादा सुनाई दिया कि सरकार को लगता था वह कभी नहीं झुकेगी, लेकिन युवाओं ने साबित कर दिया कि झुकाने वाला चाहिए, सरकार भी झुकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों की पहली बड़ी मांग स्वीकार करते हुए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अन्य मांगों पर भी सहमति बनाई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि उन आश्वासनों को संसद के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब धर्मेंद्र प्रधान मंत्री पद छोड़ने के बाद संसद पहुंचे तो उनका स्वागत हुआ, लेकिन इस फैसले से सदन के कई सदस्यों ने राहत की सांस ली होगी।
क्या छात्र आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया?
अखिलेश यादव ने कहा कि यह पहला ऐसा छात्र आंदोलन था, जिसमें केवल छात्र ही नहीं बल्कि उनके माता-पिता भी खुलकर साथ आए। उन्होंने कहा कि लगभग 20 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी और अगर उनके परिवारों को भी जोड़ लिया जाए तो करोड़ों लोग इस मुद्दे से प्रभावित हुए। उनके मुताबिक, यही कारण था कि आंदोलन इतना बड़ा बन गया। उन्होंने कहा कि आंदोलन की सफलता ने यह भी दिखाया कि सरकार तब ही मांगें मानती है, जब उस पर दबाव बनता है। उन्होंने 2020-21 के किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने चुनाव नजदीक आने पर तीनों कृषि कानून वापस ले लिए थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि छात्रों की बाकी मांगें भी सरकार स्वीकार करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि जो दल शुरुआत में मजाक लगता था, वह आगे चलकर बड़ा आंदोलन बन गया और सरकार को झुकना पड़ा।
पेपर लीक और एनटीए को लेकर अखिलेश ने क्या सवाल उठाए?
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार ने 2024 में भी पेपर लीक रोकने के लिए कानून बनाया था, फिर उसके बाद भी नीट-यूजी 2026 जैसी परीक्षा में कथित पेपर लीक कैसे हो गया। उन्होंने कहा कि अगर कानून प्रभावी होता तो सरकार को दोबारा संशोधन विधेयक लाने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में कई परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने दरोगा भर्ती, जूनियर इंजीनियर भर्ती, ग्राम विकास पंचायत अधिकारी भर्ती, नलकूप चालक भर्ती, यूपीटीईटी, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा, सिपाही भर्ती, सहायक प्रोफेसर भर्ती और लेखपाल भर्ती जैसी परीक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई मामलों में अदालत तक जाना पड़ा और परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में आउटसोर्स व्यवस्था अपनाई गई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को डर है कि जिस तरह परीक्षाएं आउटसोर्स हुई हैं, कहीं पूरी सरकार ही आउटसोर्स न हो जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि परीक्षा प्रक्रिया में आउटसोर्स कर्मचारियों की भूमिका और जवाबदेही स्पष्ट की जाए।
शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों पर क्या आरोप लगाए?
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद शिक्षा, परीक्षा और विश्वविद्यालयों की व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को एक रंग में रंगने का प्रयास किया, जिससे छात्रों में नाराजगी बढ़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सबसे पहले प्राथमिक विद्यालयों पर हमला किया और बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद कर दिए। अखिलेश ने दावा किया कि देश में एक लाख से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 26,386 स्कूल बंद किए गए। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को हुआ, क्योंकि उनकी पढ़ाई की शुरुआत सरकारी स्कूलों से होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई और प्रभावित अभ्यर्थी वर्षों से अदालतों और सरकार के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि माध्यमिक विद्यालय भी बंद किए जा रहे हैं और उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
भर्ती, आरक्षण और युवाओं के भविष्य पर क्या बोले?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रियाओं में दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकार छीने गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की पढ़ाई और नौकरी दोनों पर चोट पहुंचा रही है। उन्होंने अग्निवीर भर्ती का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पहले जहां हर साल बड़ी संख्या में भर्ती होती थी, अब संख्या कम हो गई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार युवाओं को देश का जनसांख्यिकीय लाभ (डेमोग्राफिक डिविडेंड) मानती है तो उसे उनकी शिक्षा और रोजगार को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो यही वर्ग आगे चलकर सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
संसद में किरेन रिजिजू के साथ क्या बहस हुई?
बहस के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अखिलेश यादव से पूछा कि क्या छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार का उनकी बात सुनकर संसद में विधेयक लाना बेहतर है या फिर आंदोलन को कुचलने के लिए आपातकाल लगाना। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने आपातकाल नहीं देखा, लेकिन दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आंसू गैस, बैरिकेडिंग, नुकीले अवरोध और अन्य सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल देखा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति भी किसी आपातकाल से कम नहीं थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह आपातकाल के बाद बदलाव आया था, उसी तरह आगे भी परिवर्तन होगा।
कानून नहीं, सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
अपने भाषण के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि केवल नया कानून बना देने से पेपर लीक नहीं रुकेगा। उनके अनुसार, अगर सरकार की नीयत साफ होगी तो परीक्षाएं भी साफ होंगी। उन्होंने कहा कि सवाल कानून का नहीं बल्कि उसे लागू करने की इच्छा का है। उन्होंने नीट परीक्षा से जुड़े उन छात्रों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने कथित घटनाक्रम के दौरान अपनी जान गंवाई। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांग के अनुसार ऐसे परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर सरकार को विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर कर रही है। उन्होंने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा, “अगर शिक्षा अच्छी होगी, परीक्षा सच्ची होगी तो तरक्की भी पक्की होगी। शिक्षा की रक्षा के लिए जो आंदोलन हुआ है, वह आगे भी जीतता रहेगा।”

