रोहित यादव का 87.05 मीटर भाला फेंक, एथलेटिक्स में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन

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Bhubaneswar : उत्तर प्रदेश के भाला फेंक खिलाड़ी रोहित यादव ने नेशनल इंटर-स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 87.05 मीटर का शानदार थ्रो कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कभी टोक्यो ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के अंडरस्टडी माने जाने वाले रोहित यादव ने इस प्रदर्शन के साथ खुद को भारत के प्रमुख जेवलिन थ्रोअर के रूप में मजबूती से स्थापित कर लिया है।दक्षिण-एशियाई और प्रवासी रोहित यादव का यह थ्रो इस सीज़न का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन माना जा रहा है, जिससे भारतीय एथलेटिक्स में भाला फेंक प्रतिस्पर्धा और भी रोचक हो गई है। उनके इस प्रदर्शन ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी संभावनाओं को मजबूत किया है।

इसी प्रतियोगिता में पुरुषों की लॉन्ग जंप स्पर्धा में भी बेहतरीन प्रदर्शन देखने को मिला। भारत के स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने 8.38 मीटर की छलांग लगाकर एशियाई सीज़न की सर्वश्रेष्ठ (एशियन सीज़न बेस्ट) उपलब्धि दर्ज की। श्रीशंकर का यह प्रदर्शन उनके निरंतर सुधार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को दर्शाता है। उनकी छलांग ने उन्हें आगामी बड़े टूर्नामेंटों के लिए मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित किया है।

इसी स्पर्धा में शाहनवाज़ खान ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 8.30 मीटर की छलांग लगाई और एशियाई खेलों के लिए क्वालिफिकेशन हासिल कर लिया। दोनों खिलाड़ियों की लगातार बेहतरीन परफॉर्मेंस ने भारत के लॉन्ग जंप क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं। इस प्रतियोगिता में भारतीय एथलेटिक्स के कई युवा और अनुभवी खिलाड़ियों ने भाग लिया, लेकिन रोहित यादव, मुरली श्रीशंकर और शाहनवाज़ खान के प्रदर्शन विशेष रूप से चर्चा में रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि रोहित यादव का 87 मीटर से अधिक का थ्रो उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले एलीट जेवलिन थ्रोअर्स की श्रेणी में लाता है। वहीं लॉन्ग जंप में दो खिलाड़ियों का एशियाई स्तर की क्वालिफिकेशन हासिल करना भारत के लिए सकारात्मक संकेत है।दक्षिण-एशियाई और प्रवासी इस प्रदर्शन के बाद भारतीय एथलेटिक्स महासंघ और खेल विशेषज्ञों ने खिलाड़ियों के निरंतर सुधार पर संतोष व्यक्त किया है और उम्मीद जताई है कि आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत का प्रदर्शन और बेहतर होगा। इन नतीजों ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारतीय एथलेटिक्स में नई पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है और विश्व स्तर पर चुनौती देने की क्षमता रखती है।