ऐयर इंडिया मादक द्रव्यों, वर्जित दवाओं के सेवन के लिए हर पायलट की करेगी जांच

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नयी दिल्ली। टाटा समूह की विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने अपने हर पायलट की मादक द्रव्यों और वर्जित दवाओं के सेवन के लिए जांच करने का फैसला किया है।

कंपनी ने उड़ान के बाद इस जांच को सभी पायलटों के लिए गुरुवार से अनिवार्य कर दिया है। यह फैसला गत चार अगस्त को फुकेट-दिल्ली उड़ान के दौरान विमान के हवा में अचानक 300 फुट नीचे गोता लगाने की घटना के बाद किया गया है। नशीले पदार्थ के सेवन के लिए किये गये स्क्रीनिंग टेस्ट में उड़ान का मुख्य पायलट पॉजिटिव पाया गया था। उसका सैंपल प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा गया है।

उड़ान संख्या एआई 2379 के साथ हुई इस गंभीर घटना में 20 यात्री और चालक दल के चार सदस्य घायल हो गये थे। उड़ान में तीन शिशुओं समेत 137 यात्री और दो पायलट समेत चालक दल के आठ सदस्य थे।

एयर इंडिया में उड़ान परिचालन के प्रमुख महेश उप्पल ने एयरलाइंस के पायलटों को आज एक पत्र जारी कर बताया, “…हमने ग्रुप के सभी पायलटों की उन सभी पदार्थों या दवाओं के लिए पूर्ण स्क्रीनिंग कराने का निर्णय लिया है, जिनकी नियमों के तहत अनुमति नहीं है। यह परीक्षण अनिवार्य है और आज 13 अगस्त 2026 से शुरू होगा।”

उन्होंने बताया कि यह परीक्षण एयरलाइंस की गुरुग्राम अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान, उड़ान के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर या एयर इंडिया कार्यालयों में या पायलट के संबंधित बेस द्वारा निर्धारित स्थानों पर किया जायेगा।

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के नियमों के मुताबिक, मादक पदार्थों के लिए सभी पायलटों की जांच जरूरी नहीं है। डीजीसीए ने औचक जांच का प्रावधान किया है। उप्पल ने लिखा कि यह पहल जो नियामकीय आवश्यकताओं से आगे बढ़कर है, सुरक्षा और पेशेवर मानकों के उच्चतम स्तर को बनाए रखने तथा यात्रियों, हितधारकों और व्यापक समुदाय को आश्वस्त करने के कंपनी के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।

उन्होंने लिखा कि दशकों से एयर इंडिया भारतीय विमानन क्षेत्र का ध्वजवाहक रहा है। इस दौरान एयरलाइंस के पायलटों तथा अन्य कर्मचारियों की पेशेवर क्षमता, कौशल और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ने लाखों यात्रियों और व्यापक समुदाय का विश्वास अर्जित किया है। यह विश्वास कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति है, और इसकी रक्षा करना तथा इसे बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।