खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले चार महीनों में जिले के खैरागढ़ और छुईखदान ब्लॉक में 662 डॉग बाइट और 49 स्नेक बाइट के मामले सामने आए हैं। ये आंकड़े केवल सरकारी अस्पतालों में दर्ज मामलों के हैं। औसतन हर दिन 5 से 6 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, छुईखदान ब्लॉक में 381 डॉग बाइट और 31 स्नेक बाइट, जबकि खैरागढ़ ब्लॉक में 281 डॉग बाइट और 18 स्नेक बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं। सबसे अधिक खतरा छोटे बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम पैदल निकलने वाले लोगों को बताया जा रहा है। कई मोहल्लों और गांवों में आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते देखे जा रहे हैं।
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि कुत्ते के काटने पर लापरवाही न बरतें। रेबीज एक जानलेवा बीमारी है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है। कुत्ता या सांप काटने की स्थिति में सबसे पहले घाव को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचकर उपचार कराना चाहिए। झाड़-फूंक या घरेलू इलाज पर भरोसा करना खतरनाक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी रैबीज वैक्सीन (ARV) और एंटी स्नेक वेनम (ASV) पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और जरूरतमंद मरीजों का तत्काल उपचार किया जा रहा है।
वहीं, लगातार बढ़ते डॉग बाइट के मामलों ने नगर पालिका, नगर पंचायत और पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन नसबंदी, टीकाकरण और पकड़ने का अभियान प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो रहा। स्कूल, बाजार, अस्पताल और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों पर भी कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या के समाधान के लिए केवल कुत्तों को पकड़ना पर्याप्त नहीं होगा। बड़े स्तर पर नसबंदी, एंटी रेबीज टीकाकरण, बेहतर कचरा प्रबंधन और नियमित निगरानी अभियान चलाने की जरूरत है। उनका कहना है कि स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों के बिना डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं होगा।
