तेहरान। अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान की राजनीति में भी उथल-पुथल तेज होती दिखाई दे रही है। देश में सत्ता संघर्ष और संभावित तख्तापलट की अटकलें जोर पकड़ रही हैं। कट्टरपंथी गुटों ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर अमेरिका के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्हें खुली चेतावनी दी है। एक कट्टरपंथी नेता ने सार्वजनिक मंच से कहा कि यदि इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों से समझौता किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
बताया जा रहा है कि, अमेरिका के साथ युद्धविराम और प्रतिबंधों में राहत की कोशिशों ने कट्टरपंथी धड़े को नाराज कर दिया है। इसी बीच नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की लगातार गैरमौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है। कट्टरपंथी नेताओं का दावा है कि सरकार सर्वोच्च नेतृत्व की भूमिका कमजोर कर सत्ता का संतुलन बदलने की कोशिश कर रही है।
वहीं सरकार ने भी कुछ कट्टरपंथी नेताओं का प्रभाव कम करने के संकेत दिए हैं। दूसरी ओर, कट्टरपंथी धड़ा अमेरिका और इजरायल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की वकालत कर रहा है। इन घटनाक्रमों के बीच ईरान की आंतरिक राजनीति में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे देश की राजनीतिक स्थिरता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

