वॉशिंगटन/तेहरान। जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए घातक हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, 17 जुलाई को जॉर्डन में ईरान समर्थित बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों का जवाब देते हुए दो और अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि एक सैनिक अब भी लापता है। इस घटना के बाद पश्चिम एशिया में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या 16 हो गई है।
हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ नए हवाई अभियान शुरू कर दिए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन एयरस्ट्राइक का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी हितों के लिए खतरा पैदा कर रहा है। साथ ही जॉर्डन हमले के लिए जिम्मेदार ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उससे जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी सेना ने कहा कि, शांति वार्ता विफल होने के बाद क्षेत्र में तैनात उसके सैनिक लगातार ईरान और उसके सहयोगी गुटों के निशाने पर हैं। फिलहाल मारे गए सैनिकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं तथा बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
